आगरा के कवि डॉ. अंगद धारिया का व्हाट्सएप हैक! शादी के फर्जी कार्ड के ज़रिए ठगी की साज़िश

आगरा। आगरा के वरिष्ठ कवि और साहित्यकार डॉ. अंगद धारिया का व्हाट्सएप (WhatsApp) अकाउंट हैक कर ठगी की कोशिश की गईं। साइबर अपराधियों ने उनकी प्रोफ़ाइल से साहित्यकारों और परिचितों को फर्जी शादी के निमंत्रण कार्ड भेजना शुरू कर दिया। यह कार्ड एपीके (APK) फाइल के रूप में भेजा गया, जिसे खोलते ही मोबाइल में मैलवेयर सक्रिय होकर यूज़र का पूरा डेटा और बैंकिंग डिटेल्स तक हैक कर लेता है।

Nov 11, 2025 - 17:20
 0
आगरा के कवि डॉ. अंगद धारिया का व्हाट्सएप हैक! शादी के फर्जी कार्ड के ज़रिए ठगी की साज़िश
आगरा के कवि डॊ. अंगद धारिया।

कवि की ओर से शादी कार्ड के नाम पर ठगी की चाल

डॊ. धारिया के के अनुसार, मंगलवार तड़के चार बजे के आसपास उनके एक शुभचिंतक ने उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया। सुबह उन्होंने देखा तो उन्हें पलटकर फोन किया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने जो इनविटेशन कार्ड भेजा है, वह खुल नहीं रहा। इससे उनका माथा ठनका क्योंकि उन्होंने तो कोई निमंत्रण पत्र भेजा ही नहीं था। इसके बाद एक-एक कर कई मित्रों के भी फोन आने लगे। उन्हीं में से कुछ ने आगाह किया कि यह साइबर ठगों की हरकत है, इसलिए इस एपीके फाइल को खोले नहीं। उधर डॊ. धारिया के व्हाटसएप नंबर से उनके मिलने वाले तमाम साहित्यकारों और कवि मित्रों को डॉ. अंगद संदेश पहुंच रहे थे, जिसमें शादी का कार्ड डाउनलोड करने के लिए एक लिंक दिया गया था।

इधर खतरे को भांपकर डॊ. धारिया ने तत्काल अपने व्हाटएसप नंबर से सभी को यह संदेश भेजा कि यह निमंत्रण कार्ड उन्होंने नहीं भेजा है। इसके साथ ही उन्होंने सभी को आगाह भी कर दिया कि यह किसी गलत एप से की गई हरकत है। सुबह उठने के बाद जो लोग इस लिंक पर क्लिक करते, इससे पहले ही उन्हें कवि धारिया की ओर से सूचना मिली कि उनका व्हाट्सऐप अकाउंट हैक हो गया है।

बता दें कि हैकर इस लिंक के ज़रिए लोगों के मोबाइल में स्पाय सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देते हैं, जिससे उनका WhatsApp Data, Gallery, Contacts, और Banking Apps तक एक्सेस में आ जाती हैं।

फर्जी शादी कार्ड, गिफ्ट लिंक आदि हैं साइबर ठगों के नये तरीके

साइबर सेल अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जहां फर्जी शादी के कार्ड, गिफ्ट लिंक या इनविटेशन ऐप्स भेजकर लोगों के मोबाइल को हैक किया जा रहा है।

ऐसे फर्जी लिंक में आम तौर पर .apk, .zip या .pdf फॉर्मेट में “वायरस युक्त फाइल छिपी होती है। इसे खोलने पर उपयोगकर्ता का ओटीपी, बैंक लॊगिन और गैलरी एक्सेस अपराधियों के सर्वर तक पहुंच जाता है।

Top of Form

SP_Singh AURGURU Editor