अखिलेश यादव के थानों को लेकर जातीय आरोप आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने नकारे, डीजीपी ने दी नसीहत
आगरा। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश में पुलिस थानों में जातिगत भेदभाव के आरोपों पर राज्य पुलिस और आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने कड़ा खंडन किया है। आगरा पुलिस कमिश्ररेट ने तो आंकड़े जारी कर अखिलेश यादव को आईना दिखाया है जबकि पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने सपा प्रमुख को नसीहत दी है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
-आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने एक्स पर लिखा- आगरा के थानों में 39 प्रतिशत ओबीसी और 19 प्रतिशत एससी प्रभारी
-लखनऊ में डीजीपी प्रशांत कुमार बोले- जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसी भ्रामक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए
आगरा में यह कहा था अखिलेश यादव ने
हाल ही में सांसद रामजीलाल सुमन से मिलने आगरा आए अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि प्रदेश में पुलिस थानों में 'सिंह भाई' (ठाकुर समुदाय) के अधिकारियों का वर्चस्व है। आगरा जिले के बारे में उन्होंने कहा कि आगरा में कुल 48 थानों में से केवल 15 थानों के प्रभारी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग से हैं, बाकी 'सिंह भाई लोग' हैं।" उन्होंने मैनपुरी, चित्रकूट और महोबा जिलों में भी इसी तरह के आंकड़े प्रस्तुत किए थे।
डीजीपी का बयान- सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इन आरोपों के बारे में सोमवार को लखनऊ में मीडिया ने जब उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार से सवाल किए तो उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को बिना तथ्यों के ऐसे भ्रामक बयान नहीं देने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस बल में तैनाती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है, और जातिगत आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। थानों के प्रभारी सरकारी आदेश के मुताबिक ही तैनात होते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।
आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने कहा-ओबीसी के 27 प्रतिशत के सापेक्ष 39 प्रतिशत थाना प्रभारी
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इन आरोपों को आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने भी अखिलेश यादव का नाम लिए बगैर नकार दिया है। कमिश्नरेट के अनुसार, थानों में तैनाती जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर की जाती है।
आगरा पुलिस कमिश्रनरेट ने एक्स पर लिखा, आगरा जनपद में कतिपय सोशल मीडिया साइट्स/हैण्डलर्स/माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स के द्वारा एसएचओ की नियुक्ति के बारे में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किये जा रहे हैं। इसके सम्बन्ध में अवगत कराना है कि शासन के निर्देशों के अनुसार एसएचओ की नियुक्ति के नियमों का अक्षरसः पालन किया जा रहा है। कमिश्नरेट आगरा में 39%ओबीसी संवर्ग, 19% एससी संवर्ग तथा सामान्य संवर्ग के 42% थाना प्रभारी नियुक्त है, जबकि शासनादेश के अनुसार ओबीसी संवर्ग के 27% नियुक्त होने चाहिए। समाज के जिम्मेदार लोगों/सोशल मीडिया साइट्स/माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स आदि लोगों से अपेक्षा की जाती है कि कृपया वे भ्रामक तथ्यों से लोगों को भ्रमित नही करें, अपितु सही तथ्यों से जानकारी उपलब्ध करायें।
अखिलेश यादव के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। जहां सपा अध्यक्ष इसे सामाजिक न्याय का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पुलिस इसे बेबुनियाद और भ्रामक बता रही है।