आगरा में शू ट्रेडर के यहां हुई चोरी की बरामद रकम 97 लाख न दर्शाने के लिए पुलिस पर बहुत दबाव बनाया गया पर किसी एक न चली, हींग की मंडी में कैश कारोबार का काला सच बेनकाब, दूसरी फर्मों में भी खलबली
आगरा। हींग की मंडी स्थित कॊमर्शियल कॊम्पलेक्स प्रकाशवंती पैलेस में संचालित हरवीरा शू होलसेलर में हुई चोरी आपराधिक वारदात के साथ ही करोड़ों रुपये के कैश कारोबार को दबाने की कोशिश का बड़ा खुलासा बन गई है। चोरों से 97 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद पुलिस पर हरचंद दबाव डाला गया कि बरामद रकम को 20–22 लाख तक सीमित दिखाया जाए, लेकिन पुलिस ने कोई दबाव नहीं माना। रकम को दबाने के प्रयासों में हींग की मंडी के कुछ व्यापारी नेताओं की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
हरवीरा शू होलसेलर फर्म को खेमचंद वंजानी और हरीश चंद वंजानी, दो सगे भाई, संयुक्त रूप से संचालित करते हैं। फर्म की ऑल इंडिया लेवल पर सप्लाई बताई जाती है और प्रतिदिन करोड़ों रुपये की बिक्री का दावा किया जाता है। परसों रात फर्म में चोरी की वारदात हुई। व्यापारी ने पुलिस को भी चोरी की रकम 20–22 लाख रुपये बताई।
सीसीटीवी से चोरों तक पहुंची पुलिस
चोरी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में साफ दिखा कि चोर रात करीब 1:30 बजे हरवीरा शू में चोरी कर गली से निकलते हैं, जबकि 2:30 बजे उन्होंने बिजलीघर चौराहे से किराये पर ऑटो लिया। इसी तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए लोहामंडी और शाहगंज क्षेत्र से चोरों को उठा लिया।
पुलिस की दबिश के दौरान चोरों के पास से बोरे में भरी 97 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई। यहीं से पूरा मामला पलट गया। चोरी की रकम 20–22 लाख बताने वाला दावा खुद-ब-खुद सवालों के घेरे में आ गया।
व्यापारी नेता की दबाव राजनीति बेनकाब
चोरों की गिरफ्तारी और भारी नकदी बरामदगी की खबर मिलते ही हींग की मंडी का एक व्यापारी नेता भी मौके पर पहुंच गया। आरोप है कि इस व्यापारी नेता पुलिस पर दबाव बनाया कि केवल 20–22 लाख की चोरी ही दर्शाई जाए और शेष रकम का खुलासा न किया जाए। यहां तक कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं से भी दबाव बनवाने की कोशिश की गई, लेकिन आगरा पुलिस ने किसी दबाव को स्वीकार नहीं किया और पूरी 97 लाख रुपये की बरामदगी का खुलासा कर दिया।
पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले तक व्यापारी नेता लगातार कोशिश करता रहा कि 97 लाख की बात सार्वजनिक न हो, लेकिन उसकी एक न चली। पुलिस ने साफ तौर पर बताया कि व्यापारी द्वारा बताई गई रकम और बरामद नकदी में जमीन-आसमान का अंतर है।
कैश कारोबार का खुला राज, विभागों की एंट्री तय, अन्य फर्मों में खलबली
97 लाख रुपये की नकद बरामदगी से यह साफ हो गया है कि हींग की मंडी में बड़े पैमाने पर कैश में लेन-देन हो रहा है। सूत्रों के अनुसार आगरा पुलिस इस बरामदगी की जानकारी आयकर विभाग और जीएसटी विभाग को देगी, जिसके बाद जांच तय मानी जा रही है। इसी आशंका के चलते हींग की मंडी से जुड़े कई अन्य ट्रेडर्स में खलबली मची हुई है और वे अपने खातों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
हरवीरा शू के मालिकों में से हरीश वंजानी विजय नगर कॉलोनी के एक अपार्टमेंट में रहते हैं, जबकि खेमचंद वंजानी फतेहाबाद रोड क्षेत्र में निवास करते हैं। सवाल यह है कि जब डिजिटल लेन-देन का दौर है, तब इतना बड़ा कारोबार कैश में कैसे और क्यों किया जा रहा था?
पुराना मामला, वही कहानी?
गौरतलब है कि कुछ माह पहले आगरा के ही एक अन्य शू ट्रेडर के यहां से करोड़ों रुपये कैश और करोड़ों की पर्चियां मिली थीं। बाद में वह मामला रफा-दफा हो गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या 97 लाख की यह बरामदगी भी दबा दी जाएगी या जांच सच तक पहुंचेगी?
यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि कैश इकोनॉमी, दबाव की राजनीति और सिस्टम की पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा बन चुका है।