आगराः सवालों में पुलिसिंग, लात-घूंसे और पट्टे वाली पिटाई, चिता पर पेट्रोल फिर भी कार्रवाई नदारद

आगरा पुलिस में हाल की तमाम घटनाओं- लात-घूंसे के वायरल वीडियो, पट्टे से की गई पिटाई, चिता पर पेट्रोल डालने जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से प्रभावी और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे जनता का विश्वास डगमगा रहा है और पुलिस व्यवस्था पर 'निरंकुशता' के आरोप गहरे हो रहे हैं।

Aug 11, 2025 - 18:33
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आगराः सवालों में पुलिसिंग, लात-घूंसे और पट्टे वाली पिटाई, चिता पर पेट्रोल फिर भी कार्रवाई नदारद

आगरा। आगरा कमिश्नरेट में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों से जुड़े कई ऐसे वीडियो और घटनाक्रम वायरल हुए हैं जिनसे स्थानीय लोगों में रोष और सवाल बढ़ गए हैं। एक ओर दंगल-कार्यक्रम के दौरान थानाध्यक्ष द्वारा युवकों को लात मारते हुए वीडियो सामने आया, वहीं दूसरी ओर पट्टे से की गई बर्बर पिटाई, चिता पर पेट्रोल डालकर जलाने के मामले और नशे में तैनात पुलिसकर्मियों की झड़पें सार्वजनिक हुईं। इन घटनाओं के बावजूद विभागीय कार्रवाई नगण्य रही है, जिससे पुलिस पर निरंकुशता और जवाबदेही के अभाव के आरोप लग रहे हैं।

खेरागढ़ में कोतवाल के लात-घूंसे चलाने पर भी चुप्पी

खेरागढ़ में आयोजित दंगल कार्यक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन सुनील बंसल की मौजूदगी में बने एक वीडियो में थाना प्रभारी सौरभ सिंह को कुछ युवकों पर लात-घूंसे चलाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में थानाध्यक्ष के व्यवहार को अनुचित और अभद्र कहा जा रहा है; स्थानीय लोगों और दर्शकों ने इसे मानवीय संवेदना की कमी बताया है।

जानकारी के मुताबिक़ यह थानाध्यक्ष पहले बमरौली कटारा थाने में तैनात रहे हैं और वहां उनके खिलाफ कई विवादित शिकायतें दर्ज रहीं। उस समय कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने उन्हें चार्ज से हटाने की सिफारिश तक की थी, परन्तु विभागीय स्तर पर कोई ठोस दण्डात्मक कार्रवाई नजर नहीं आई और बाद में उन्हें दूसरी पोस्टिंग मिल गई। खेरागढ़ के वायरल वीडियो के बाद भी अभी तक किसी विभागीय कार्रवाई या जांच की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या वरिष्ठ अधिकारी ऐसे व्यवहार को अनदेखा कर रहे हैं।

ट्रांस-यमुना: पट्टे से पिटाई का वीडियोः पार्ट-2 ने से बेनकाब होने पर नो एक्शन

ट्रांस-यमुना थाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया जिसमें एक सिपाही किसी युवक को पट्टे से पीटते हुए दिखता है। पहले आगरा के पुलिस प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं लग रहा; हालांकि कुछ समय बाद वायरल हुई दूसरी क्लिप (पार्ट-2) ने यह स्पष्ट कर दिया कि पीटा गया युवक कोई अपराधिक दस्तावेज़ी स्थिति वाला अपराधी नहीं था और उसे उठाकर ऐसा दर्शाया गया था।

वीडियो वायरल होने के कारण आरोपी सिपाही की पहचान भी हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार वह वर्तमान में एत्माउद्दौला थाना से संबद्ध है। उसके ऊपर चोरी की संदिग्ध मोटरसाइकिल चलाने का आरोप भी सामने आया, पर उस मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। पीड़ित युवक को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, पर घटना की तह में जाने और असल आरोपियों पर मुकदमा चलाने को लेकर प्रशासन अब तक सक्रिय नहीं दिखा।

सैयां क्षेत्र: चिता पर पेट्रोल डालने के अमानवीय कृत्य पर भी कोई कार्रवाई नहीं

सैयां थाना क्षेत्र से नीरज बघेल नामक युवक की संदिग्ध मौत और उसके बाद चिता पर पेट्रोल डालकर जलाने का वायरल वीडियो भी सामने आया है। परिजनों का कहना है कि नीरज की मुठभेड़ के नाम पर हत्या की गई और बाद में शव को जला दिया गया। वायरल क्लिप में थाना सैयां का एक पुलिसकर्मी चिता पर पेट्रोल डालता दिखाई दे रहा है, परन्तु घटना व स्थान की पुख्ता पुष्टि के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। परिजन और ग्रामीण इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

नशे में हंगामा करते पुलिस वालों को पकड़ने गये इंसपेक्टर खुद भी नशे में थे

एक अन्य घटना में सूचना पर पहुंचने वाले इंस्पेक्टर महोदय स्वयं नशे की हालत में मिले। मामले का विवरण यह है कि एक थाने के दो दरोगा और एक कांस्टेबल सार्वजनिक जगह पर शराब पीकर बदतमीजी कर रहे थे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर की भी नशे की हालत देखी गई, जिससे उन तीनों पुलिसकर्मियों को भी कार्यवाही से राहत मिल गई। अगले दिन विभाग में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा रही, पर कोई स्पष्ट विभागीय अनुशासनात्मक कदम सार्वजनिक नहीं हुआ।

पकड़े गए 10 व्यक्ति, फिर रिहाई और 'मलाई' की चर्चा

हाल ही में एक छापे में पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार इन दस में से तीन को पश्चिम जोन के एक थाने से रिहा कर दिया गया। फिर शेष बचे लोगों को सिटी जोन में शिफ्ट किया गया, जहां से तीन और रिहा किए गए। अंततः बाकी चारों को भी एक अन्य चौकी पर शिफ्ट कर उनकी रिहाई से मामला शांत कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में रिहाई के पीछे 'मलाई' की चर्चाएं विभाग में चल रही हैं, और यह आरोप उठ रहे हैं कि गिरफ्तारियों के बाद मोल-भाव कर ममता या प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है।

महिला दरोगा की चेन चोरी का मामला गुपचुप निपट गया

एक महिला दरोगा के घर में काम करने वाली कामवाली द्वारा चेन चोरी करने और उसे दो सुनारों को बेचने का मामला सामने आया। पुलिस ने सुनारों और चोर को पकड़ लिया तथा चैन का पैसा बरामद होने का दावा किया गया, लेकिन मामला अपराध दर्ज कर कार्रवाई करने के बजाय स्थानीय समझौते के तहत निपटा दिया गया। इस मामले पर एक आयोग ने दरोगा के खिलाफ कथित तौर पर कड़ा रुख अपनाया हुआ है। इन्हीं दरोगा ने एक जुआ भी लूट लिया था, जिसमें तत्कालीन डीसीपी ने उनसे चौकी छीन ली थी, लेकिन इन्होंने फिर से मनचाही पोस्टिंग करा ली है।

जुआरियों की गिरफ्तारी से रिहाई तक व्यवस्थित खेल

एक थाने में पांच जुआरियों को जुआ खेलते पकड़ा गया। सूत्रों के अनुसार, जुआ के आयोजक और माहिर व्यक्ति की पुलिस से सांठ-गांठ है। आयोजक ने ही पांचों जुआरियों को पकड़वया। मुकदमा तो दर्ज हुआ पर रिहाई की शर्तों और जमानत के समय बड़े खेल-खिलवाड़ की बातें सामने आई। आरोप यह भी था कि पुलिस ने आयोजक से कहा कि वह महीने में पांच-दस खेल कराता रहे, जिससे यह संदेह प्रबल हुआ कि जुए के खिलाफ कार्रवाई चुनिंदा थी।

थाने ने तमंचा मंगाया पर पैसा नहीं दिया

जिले के एक थाने को तमंचे की आवश्यकता के चलते तमंचा मंगाया गया, पर उससे जुड़ा खर्च विभाग में भुगतान के लिए पेंडिंग है और तमंचा देने वाला पक्ष पैसे की मांग कर रहा है। कोई तमंचा का भुगतान नहीं कर रहा। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर तमंचे की आवश्यकता क्यों पड़ी। विभाग में चर्चाएं तो यह भी आम हैं कि आजकल तमंचों के रेट बढ़ गये हैं।

व्यापारी की महंगी चेन लूट का पूरा खुलासा होने पर भी आधा-अधूरा

एक व्यापारी की लगभग 10-11 लाख रुपए की सोने की चेन लूटी गई थी। बाद में आरोपी पकड़े गए और पुलिस ने वह सुनार भी पकड़ लिया, जिसे यह चेन बेची गई थी। पुलिस ने बहुत थोड़ी सी रकम बरामद दिखा दी जबकि सूचनाएं तो यहां तक हैं कि पुलिस ने सुनार से गलाई जा चुकी चेन का सोना भी बरामद कर लिया था। पीड़ित व्यापारी अब भी यह जानने के लिए परेशान है कि शेष रकम/चेन का क्या हुआ। जिस थाना क्षेत्र का यह मामला है, वहां के कोतवाल खुद को वरिष्ठों का खास बताते हैं। बात-बात में सभी से कहते हैं कि 58 साल के हो चुके हैं। लास्ट पारी है। इस लास्ट पारी को वे ब्रायन लारा की तरह खेल रहे हैं, जब लारा ने क्रीज पर जमे रहकर 400 रन बना डाले थे। ये कोतवाल साहब यह भी कहते हैं कि उनके पास होटल का खर्चा कुछ ज्यादा ही रहता है। इसे अपनी जेब से तो नहीं देंगे।

कानून का जानकार दरोगा और प्रभावी पोस्टिंग के चर्चे

कानून की डिग्री हासिल कर चुके कुछ दरोगा ऐसे भी हैं जिन्हें संबंध और चापलूसी के कारण मलाईदार पोस्टिंगें मिलीं। एक दरोगा पर पहले पिछली पोस्टिंग वाले जिले में एक बड़े गैंग बेच देने का आरोप था और उनका निलंबन भी हुआ था, पर आगरा में आने के बाद उक्त दरोगा को प्रभावी तैनाती दे दी गई। पिछले दिनों यह दरोगा पूछताछ के दौरान ऐसे सवाल करता दिखा कि एक किन्नर बेहोश हो गया। लगा कि किन्नर की सांसें तो नहीं रुक गईं, इसी भय से दरोगा जी भाग खड़े हुए। बाद में यह मामला किसी तरह शांत कर दिया गया। क्षेत्र के लोग इन दरोगा जी का मेन्यु कार्ड देखकर तनाव में रहते हैं क्योंकि इनका मेन्यु कार्ड फाइव स्टार से भी महंगा है।

दरोगा का जलवा पूर्वी जोन में आज तक कायम है

एक दरोगा का विभाग वाले भी जलवा मान गए हैं। सब यही सोच रहे हैं काश वह भी दरोगा के नाम के आगे जो शब्द लगा हुआ है, वही लगाए होते तो मजे में होते। दरोगा का पूर्वी जोन में ही तबादला हुआ था लेकिन वह वहां नहीं गए। जिस जोन में तैनात हैं वहां पर एक खराब चौकी पर भी तबादला हो गया, लेकिन वहां जाने से भी मना कर दिया। इसके 24 घंटे के बाद ही मलाई वाली चौकी पर उनकी पोस्टिंग हो गई। दरोगा जी का जलवा देखकर लोग उन्हें जलवेदार दरोगा कहने लगे हैं।

एक ही मामले में कुछ को सजा तो कुछ को इनाम

विभाग में इन दिनों यह बात सुर्खियों में छाई हुई है कि एक ही मामले में कुछ लोगों को इनाम दिया गया है तो कुछ लोगों को सजा। एक मुठभेड़ में कुछ लोगों ने जाने से मना कर दिया था। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई। जिन साहब को रिपोर्ट देनी थी, उन्होंने अपने प्यादों को बचा लिया और उनको शहीद करा दिया जो मक्खन नहीं लगयाते थे। मुठभेड़ में जिन दो दरोगाओं ने जाने से मना किया था, उन्हें चार्ज भी मिल गया है। इसके बाद जिन लोगों पर कार्रवाई हुई वह दबी जुबान से यही बोल रहे हैं आखिर यह कहां का न्याय हैं।

चौकी प्रभारी के जुआ पकड़ने पर इंस्पेक्टर क्यों हुए नाराज

बीते दिनों नगर जोन के एक थाने में चौकी प्रभारी के द्वारा जुआ पकड़ा गया था। जुआ पकड़े जाने पर इंस्पेक्टर साहब नाराज हो गए। उन्होंने चौकी प्रभारी से कहा- मुझसे बिना पूछे जुआ कैसे पकड़ा। थाने में चर्चाएं हैं कि इंस्पेक्टर साहब और उनका कारखास जो कि पहले भी उनके साथ दूसरे थाने में था जुआ कराने वालों से पैसे ले रहे थे। जुआ पकड़े जाने पर दोनों की बात खराब हो गई।

SP_Singh AURGURU Editor