आगरा: उटंगन नदी से पानी संकट का समाधान संभव, केशो मेहरा ने जल संसाधन मंत्री को लिखा पत्र

आगरा। जनपद गंभीर पानी संकट का सामना कर रहा है। भूजल स्तर में निरंतर गिरावट और भूमिगत पानी की बढ़ती खारापन जनजीवन व कृषि दोनों के लिए चुनौती बन चुकी है। इस विषम स्थिति में उपलब्ध जल स्रोतों में उटंगन नदी सबसे सुलभ और प्रभावी साधन है।

Oct 10, 2025 - 13:02
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आगरा: उटंगन नदी से पानी संकट का समाधान संभव, केशो मेहरा ने जल संसाधन मंत्री को लिखा पत्र
पूर्व विधायक केशो मेहरा से उटंगन नदी की जलराशि के प्रबंधन को लेकर चर्चा करते सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधि।

पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता केशो मेहरा का कहना है कि नदी के प्रबंधन में सुधार मात्र से फतेहपुर सीकरी, जगनेर, खेरागढ़, शमसाबाद, पिनाहट, फतेहाबाद और बरौली अहीर विकास खंडों के डब्बू हो चुके हैंडपंप पुनः सुचारू किए जा सकते हैं। साथ ही प्रधानमंत्री की घर-घर नल का पानी योजना का भी प्रभावी क्रियान्वयन संभव है।

सिविल सोसाइटी ऒफ आगरा के एक प्रतिनिधिमंडल ने उटंगन नदी पर बांध की जरूरत को लेकर पूर्व विधायक केशो मेहरा से मुलाकात की थी। इसी के बाद श्री मेहरा ने जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा है। प्रतिनिधिमंडल में सोसाइटी के सचिव अनिल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना, फोटो जर्नलिस्ट असलम सलीमी शामिल थे।

पानी की भरपूरता और स्थानीय जल स्रोत

श्री मेहरा ने प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह आगरा आकर उटंगन नदी का आधिकारिक निरीक्षण करें। उन्होंने बताया कि राजस्थान द्वारा अवैध रूप से पानी रोके जाने के बावजूद नदी एक बड़ा स्थानीय जलग्राही क्षेत्र है। इसमें किबाड नदी (जगनेर), खारी नदी (फतेहपुर सीकरी), डब्ल्यू डी ड्रेन (किरावली), पार्वती नदी (राजाखेड़ा) जैसी मानसूनकालीन नदियों की जलधाराएं महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

बंधियों का डिसचार्ज और यमुना से संबंध

मेहरा ने बताया कि कई हजार हेक्टेयर जल डूब क्षेत्र की बंधियां मानसून थमने के बाद (लगभग 15 अक्टूबर) उटंगन नदी में पानी छोड़ती हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि यमुना नदी के जवाहर पुल (सेंट्रल वाटर कमीशन) पर जब जलस्तर खतरे के निशान (150.876 फीट / 45.87 मीटर) से ऊपर जाता है, तो नदी का पानी रेहावली गांव (फतेहाबाद) में उटंगन नदी की ओर बैक मारने लगता है। 151.48 मीटर (497 फीट) पार करने पर यमुना का पानी आगरा-बाह स्टेट हाईवे ब्रिज तक पहुंचता है। यह स्थिति जुलाई के दूसरे सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक रहती है।

विपुल जलराशि का सही उपयोग

मेहरा ने कहा कि मानसून थमने के बाद यह विपुल जलराशि यमुना में वापस निस्तारित हो जाती है, जबकि इसे संरक्षित करके व्यवस्थित उपयोग में लाकर आगरा की भूजल स्थिति में सुधार किया जा सकता है। इससे पवित्र धाम बटेश्वर को नहान पर्वों पर ताजा पानी उपलब्ध कराना भी संभव होगा।

पूर्व विधायक ने कहा कि वे राजनीतिज्ञ होने के साथ ही इंजीनियर भी हैं। उनका मानना है कि सिविल सोसायटी ऑफ आगरा की मांग के अनुरूप जिला पंचायत द्वारा रेहावली गांव में बांध बनाना सर्वथा उपयुक्त कदम होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया भी इस योजना को आगरा की जरूरत के अनुसार सहायक मानती हैं।

SP_Singh AURGURU Editor