आगरा: हिरासत में राजू की मौत के मामले में सीआईडी ने 17 पुलिसकर्मी दोषी पाए  

आगरा। सिकंदरा थाना क्षेत्र के गैलाना निवासी राजू गुप्ता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में कुल 17 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। घटना को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे और अब जांच रिपोर्ट ने विभागीय लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि कर दी है।

Apr 20, 2025 - 10:21
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आगरा: हिरासत में राजू की मौत के मामले में सीआईडी ने 17 पुलिसकर्मी दोषी पाए   

वर्ष 2018 का है मामला

नरेंद्र एन्क्लेव (गैलाना) निवासी राजू गुप्ता को वर्ष 2018 के नवंबर महीने में कालोनी के ही अंशुल के घर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए सिकंदरा थाना पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने अपनी हिरासत में ही मां रेनू गुप्ता के सामने राजू को बुरी तरह पीटा था, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। बाद में पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद थाने के सारे पुलिसकर्मी थाना छोड़कर भाग गये थे।

मृतक की मां रेनू गुप्ता ने ने पुलिस पर पिटाई और टॉर्चर का आरोप लगाते हुए सीधी कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी थी। छह साल बाद आई सीआईडी की जांच रिपोर्ट में राजू गुप्ता की मौत को पुलिस हिरासत में हुई लापरवाही और अनुचित व्यवहार का परिणाम माना गया है।

कौन-कौन शामिल

जांच में जिन 17 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया है, उनमें थाने के वरिष्ठ अधिकारी से लेकर ड्यूटी पर तैनात जवान तक शामिल हैं। इनमें से कुछ पर प्रत्यक्ष हिंसा में शामिल होने का आरोप है, जबकि कुछ पर घटना को छिपाने और रिपोर्टिंग में गड़बड़ी करने का संदेह जताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए गए कर्मियों में कुछ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि शेष के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच और आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया जारी है। सीआईडी ने मामले में चार्जशीट तैयार कर मुकदमे की स्वीकृति के लिए शासन से अनुमति मांगी है।

पुलिस की छवि पर सवाल

छह साल पुरानी इस घटना की जांच रिपोर्ट ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में पूछताछ के तौर-तरीकों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आगरा पुलिस की छवि को इस घटना से बड़ा झटका लगा है, वहीं सरकार और पुलिस प्रशासन पर पारदर्शी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

SP_Singh AURGURU Editor