आगरा के विधि-जगत का प्रकाशस्तंभ बुझा: डॉ. जगदीश किशोर पाठक का निधन
आगरा। आगरा के प्रख्यात अधिवक्ता, कुशल विधिवेत्ता और आगरा बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जगदीश किशोर पाठक का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन से विधि-जगत में शोक की लहर है। वे केवल एक नाम नहीं, बल्कि नैतिकता, सिद्धांत और निष्काम सेवा की जीवंत मिसाल थे। उनके शिष्य और सहयोगी उन्हें एक ऐसे गुरु के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने कानून को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया।
डॉ. जगदीश किशोर पाठक केवल एक प्रख्यात अधिवक्ता ही नहीं थे, बल्कि अनेक अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक और गुरु भी थे। उन्होंने अपने शिष्यों को विधि का गहन ज्ञान देने के साथ-साथ कानून की सूक्ष्म बारीकियों को समझने की दृष्टि प्रदान की। उनके सान्निध्य में पले-बढ़े अधिवक्ता आज भी उनके सिद्धांतों को अपने पेशेवर जीवन में आत्मसात किए हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने स्व. पाठक को याद करते हुए कहा कि पिछले पांच दशकों से अधिक समय तक उनका अपने शिष्यों और सहकर्मियों से आत्मीय संबंध रहा। इस दीर्घ यात्रा में उन्हें सदैव एक उदात्त, सिद्धांतनिष्ठ और सरल व्यक्तित्व के रूप में देखा गया। वे अन्य अधिवक्ताओं से इस मायने में भिन्न थे कि उन्होंने कभी भी धन या व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता नहीं दी। न्याय, नैतिकता और मानवता ही उनके जीवन के मूल मंत्र रहे।
आगरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर उनका आसीन होना सम्पूर्ण आगरा के लिए गौरव का विषय था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जिस गरिमा, संतुलन और प्रतिबद्धता के साथ दायित्वों का निर्वहन किया, वह आज भी अधिवक्ताओं के बीच आदर्श के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने बार और बेंच के बीच स्वस्थ संवाद, युवा अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन और न्यायिक मर्यादाओं की रक्षा को सदैव प्राथमिकता दी।
श्री जैन ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके निधन से विधि-जगत में जो अपूरणीय शून्य उत्पन्न हुआ है, उसकी भरपाई कर पाना अत्यंत कठिन है। उन्होंने न केवल एक सफल वकील के रूप में पहचान बनाई, बल्कि एक शिक्षक, मार्गदर्शक और शुभचिंतक के रूप में अनगिनत जीवनों को दिशा दी। उनके शिष्य आज उन्हें अपना प्रकाशस्तंभ मानते हैं, जिनकी सीख जीवन भर मार्ग दिखाती रहेगी।