आगरा के जनप्रतिनिधियों ने डिप्टी सीएम को बताया- हम जो बातें बंद कमरों में करते हैं, वे अधिकारियों तक पहुंच जाती हैं
आगरा। दो दिन पहले आगरा दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सामने जिस तरह से जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने पुलिस व प्रशासन के खिलाफ एक सुर में नाराज़गी जाहिर की, उससे साफ हो गया कि आगरा का सरकारी तंत्र खुद अपनों की नज़र में ही सवालों के घेरे में है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही जब जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बंद कमरों में हुई बैठकों की गोपनीय बातें अधिकारियों तक पहुंच जाती हैं। इसके बाद सिस्टम पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के समक्ष आगरा पुलिस और प्रशासन को लेकर जो फीडबैक सामने आया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि डिप्टी सीएम आगरा से सरकारी तंत्र की नकारात्मक छवि लेकर लौटे हैं। आगरा के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और संगठन के प्रतिनिधियों ने पुलिस को लेकर जिस तरह खुलकर अपनी भड़ास निकाली, उससे यह भी जाहिर हुआ कि यह नाराज़गी अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से भीतर ही भीतर पनप रही थी।
जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं की सबसे बड़ी शिकायत थानों को लेकर रही। सभी का एक स्वर में कहना था कि आगरा के थाने पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हैं। निर्दोष लोगों के उत्पीड़न के उदाहरण गिनाते हुए बताया गया कि पुलिस मनमानी कर रही है और आम जनता की सुनवाई नहीं हो रही। इसके साथ ही थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी खुलकर रखी गईं। नेताओं का कहना था कि लगातार पीड़ितों से मिल रहे फीडबैक के आधार पर ही पुलिस को लेकर यह धारणा बनी है।
सर्किट हाउस में डिप्टी सीएम के साथ हुई बैठक के दौरान एक और गंभीर मुद्दा सामने आया। जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने यह दर्द भी साझा किया कि बंद कमरों में होने वाली बैठकों की बातें, जिनकी रिपोर्ट सीधे लखनऊ भेजी जाती है, वे लौटकर आगरा के अधिकारियों तक पहुंच जाती हैं। इससे जनप्रतिनिधियों में अविश्वास का माहौल बन रहा है।
इस संदर्भ में जनप्रतिनिधियों का इशारा आगरा के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह द्वारा की गई उस बैठक की ओर था, जिसमें आगरा के सांसद, विधायक और भाजपा पदाधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक में सभी ने बेबाकी से आगरा पुलिस को लेकर अपना फीडबैक प्रभारी मंत्री को दिया था। बैठक की मिनिट्स लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई थीं, लेकिन कुछ ही समय बाद बंद कमरे की ये सारी गोपनीय बातें आगरा के अधिकारियों तक पहुंच गईं।
जनप्रतिनिधियों का आरोप था कि किस जनप्रतिनिधि ने किस अधिकारी के बारे में क्या कहा, यह सब उन अधिकारियों को पता चल गया। नतीजा यह हुआ कि शिकायत करने वालों के लिए असहजता बढ़ गई। डिप्टी सीएम के समक्ष जब यह मामला उठा तो सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय में ही कोई ऐसा “भेदिया” बैठा है, जिसने प्रभारी मंत्री के साथ हुई बैठक की मिनिट्स लीक कर दीं।
यह तथ्य सामने आने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी हैरान नजर आए। बैठक में मौजूद लोगों के मुताबिक, डिप्टी सीएम ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया और संकेत दिए कि इस तरह की बैठकों के मिनिट्स का लीक होना बेहद गंभीर विषय है।
कुल मिलाकर, आगरा में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल, जनप्रतिनिधियों का गुस्सा और बंद कमरों की बातें बाहर पहुंचने का मामला, तीनों ने मिलकर प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि सरकार इस लीक सिस्टम और पुलिस की मनमानी पर क्या ठोस कदम उठाती है।