आगरा के रामप्रताप सिंह निर्विरोध राज्यसभा सांसद, यूपी की 10 सीटों में 8 पर कमल, सपा को 2 सीटें

उत्तर प्रदेश की राज्यसभा की 10 सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। भाजपा ने आठ और सपा ने दो सीटें जीती हैं। आगरा के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान के राज्यसभा पहुंचने से आगरा और ब्रज क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह है। वर्ष 1991 से संगठन में सक्रिय चौहान एत्मादपुर से विधायक भी रह चुके हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके निर्वाचन को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी निर्वाचित हुए हैं।

Oct 9, 2026 - 18:09
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आगरा के रामप्रताप सिंह निर्विरोध राज्यसभा सांसद, यूपी की 10 सीटों में 8 पर कमल, सपा को 2 सीटें
राज्यसभा चुनाव में जीत का प्रमाणपत्र लेते रामप्रताप सिंह चौहान।

आगरा से लखनऊ तक समर्थकों में उत्साह, संगठन में लंबे अनुभव का मिला इनाम, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश

लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के परिणामों ने भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इनमें भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार शामिल हैं। आगरा के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान के राज्यसभा पहुंचने से ताजनगरी में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल है। उनके निर्वाचन को आगरा और ब्रज क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

रामप्रताप सिंह चौहान के राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद आगरा भाजपा में खुशी की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में समर्थक लखनऊ पहुंचे और फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन के प्रति लंबे समय से की जा रही मेहनत और समर्पण का सम्मान बताया। चौहान के उच्च सदन में पहुंचने से आगरा की राजनीतिक भागीदारी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवार जीते

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित था। हालांकि, सभी सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या 10 ही रहने के कारण मतदान की नौबत नहीं आई और सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। भाजपा की ओर से कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, प्रियंका सिंह रावत, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, राधाकांत ओझा और रामप्रताप सिंह चौहान निर्वाचित हुए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी ने राज्यसभा में जगह बनाई है।

शुक्रवार को विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार वर्मा ने निर्वाचित उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र वितरित किए। भाजपा के अधिकांश उम्मीदवार स्वयं पहुंचकर प्रमाण पत्र ले गए। राधाकांत ओझा की ओर से उनके प्रतिनिधि ने प्रमाण पत्र प्राप्त किया। सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव की ओर से पूर्व एमएलसी राकेश यादव प्रमाण पत्र लेने पहुंचे। हालांकि, शुरुआत में उनके पास अधिकृत पत्र नहीं होने के कारण निर्वाचन अधिकारी ने प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। बाद में फोन पर प्राधिकरण पत्र मंगवाए जाने के बाद प्रमाण पत्र सौंप दिया गया। धनराज नथवानी प्रमाण पत्र लेने नहीं पहुंचे। उन्होंने 12 अक्टूबर को प्रमाण पत्र प्राप्त करने की बात कही है।

अब संसद में उठाएंगे आगरा और ब्रज के मुद्दे राम प्रताप 

रामप्रताप सिंह चौहान का राजनीतिक सफर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लगातार आगे बढ़ते हुए यहां तक पहुंचा है। उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए प्रदेश नेतृत्व में अपनी जगह बनाई। वर्ष 1991 से 1994 के बीच उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद भाजयुमो के महानगर अध्यक्ष, ब्रज प्रांत प्रभारी और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। संगठन में उनकी सक्रियता के चलते उन्हें धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियां मिलती गईं।

वर्ष 2006-07 में वह भाजपा जिलाध्यक्ष रहे। वर्ष 2007 से 2012 तक ब्रज क्षेत्र महामंत्री के रूप में काम किया, जबकि 2013 से 2016 के बीच पार्टी के प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें एत्मादपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया और विधायक बने। हालांकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन संगठन में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता रहा। वर्ष 2023 में उन्हें भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। जून 2026 में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी में उन्हें लगातार दूसरी बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई। अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। इस तरह संगठन में लंबे अनुभव, क्षेत्रीय राजनीति पर पकड़ और पार्टी के प्रति निरंतर सक्रियता के बाद उनका राज्यसभा पहुंचना भाजपा की संगठनात्मक राजनीति में उनके बढ़ते कद के रूप में देखा जा रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आगरा को मिला राजनीतिक महत्व

रामप्रताप सिंह चौहान के राज्यसभा सांसद बनने को केवल एक नेता की राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसके आगरा और ब्रज क्षेत्र की राजनीति पर भी असर पड़ने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में आगरा के एक वरिष्ठ संगठनात्मक नेता को संसद के उच्च सदन में भेजना भाजपा के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। चौहान लंबे समय से आगरा और ब्रज क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। विधायक रहने के साथ उन्होंने संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है। राज्यसभा पहुंचने के बाद उनसे क्षेत्र के विकास, स्थानीय समस्याओं और ब्रज क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अपेक्षा की जा रही है। उनके निर्वाचन से आगरा भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश गया है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं बनी रहती हैं।

भाजपा के आठ उम्मीदवारों की जीत पर प्रकाश पाल ने किया बड़ा दावा

राज्यसभा में निर्विरोध निर्वाचित भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि वह पिछले 36 वर्षों से पार्टी के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। अब संसद में प्रदेश और देश की जनता की समस्याओं को उठाने का काम करेंगे। उन्होंने भाजपा के आठ उम्मीदवारों की जीत को पार्टी के मजबूत राजनीतिक आधार से जोड़ते हुए दावा किया कि इसका रुझान आगामी विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा। प्रकाश पाल ने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 80 प्रतिशत सीटें जीतेगी, जबकि इंडी गठबंधन को 20 प्रतिशत सीटें मिलेंगी। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के राजनीतिक आत्मविश्वास और चुनावी रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रियंका रावत बोलीं-साधारण कार्यकर्ता को मिली बड़ी जिम्मेदारी

राज्यसभा के लिए निर्वाचित प्रियंका सिंह रावत ने अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा को कार्यकर्ता आधारित पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि उनके जैसी साधारण कार्यकर्ता को संसद तक पहुंचने का अवसर मिलना भाजपा की संगठनात्मक व्यवस्था की विशेषता है। प्रियंका सिंह रावत वर्ष 2014 में बाराबंकी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। वह बाराबंकी की पहली महिला सांसद बनी थीं। वर्ष 2019 में पार्टी ने उनकी जगह उपेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया था। राज्यसभा में निर्वाचन के बाद उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।

सपा के सांसदों की संख्या बढ़ेगी

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा की दो सीटों पर जीत दर्ज की है। इनमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी शामिल हैं। धनराज नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उद्योग जगत में उनकी पहचान है। उन्हें उद्योगपति मुकेश अंबानी का करीबी माना जाता है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके पिता परिमल नथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं।

धनराज नथवानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उन पर विश्वास जताया है। वह उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े उनके दृष्टिकोण को संसद में आगे बढ़ाने के लिए समर्पित रहेंगे। उन्होंने शारदीय नवरात्रि के दौरान 12 अक्टूबर को अपना निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त करने की बात भी कही। दूसरी ओर, प्रो. रामगोपाल यादव लंबे समय से समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। वह अखिलेश यादव के चाचा होने के साथ पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। वह एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।

राज्यसभा में भाजपा और सपा की स्थिति पर नजर

इन चुनावों में भाजपा ने आठ सीटें जीतकर उच्च सदन में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वहीं, सपा को दो सीटें मिली हैं। धनराज नथवानी के निर्वाचन से सपा के राज्यसभा सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इस परिणाम के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में दोनों दलों के लिए राज्यसभा का महत्व फिर चर्चा में है। भाजपा जहां अपने संगठनात्मक आधार और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर उत्साहित है, वहीं सपा ने भी अपने वरिष्ठ नेता और उद्योग जगत से जुड़े चेहरे को उच्च सदन में भेजकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास किया है।

कुल मिलाकर, राज्यसभा की इन 10 सीटों के निर्विरोध निर्वाचन में भाजपा को आठ और सपा को दो सीटें मिली हैं। आगरा के रामप्रताप सिंह चौहान का राज्यसभा पहुंचना ताजनगरी की राजनीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संसद में पहुंचने के बाद वह आगरा और ब्रज क्षेत्र के मुद्दों को किस तरह उठाते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी नई भूमिका क्षेत्रीय राजनीति को कितना प्रभावित करती है।