आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुई कंधे की जटिल ‘रोटेटर कफ रिपेयर’ सर्जरी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकारी स्तर पर आधुनिक चिकित्सा तकनीक का नया अध्याय जुड़ गया है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा में पहली बार एडवांस्ड शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी (कीहोल सर्जरी) तकनीक से कंधे की रोटेटर कफ रिपेयर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह उपलब्धि न केवल मेडिकल कॉलेज के लिए गौरवपूर्ण क्षण है, बल्कि आगरा और आसपास के ज़िलों के मरीजों के लिए भी राहतभरी खबर है।

Oct 14, 2025 - 22:27
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुई कंधे की जटिल ‘रोटेटर कफ रिपेयर’ सर्जरी
एसएन मेडिकल कॊलेज में कंधे की रोटेटर कफ रिपेयर सर्जरी करते डॊ. रजत सर्व कपूर और उनकी टीम।

-डॊ. रजत सर्व कपूर और उनकी टीम ने दिया इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम

आगरा। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग में पहली बार एडवांस्ड शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी के माध्यम से रोटेटर कफ रिपेयर सर्जरी की गई। यह अत्याधुनिक सर्जरी डॉ. रजत सर्व कपूर एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल के मार्गदर्शन में की। डॊ. रजत कपूर इससे पहले भी कई जटिल सर्जरी कर चुके हैं। 

कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अब एस.एन. मेडिकल कॉलेज में कंधे की जटिल बीमारियों जैसे रोटेटर कफ टियर, बाइसेप्स टेंडन इंजरी, और शोल्डर डिसलोकेशन का इलाज आधुनिक तकनीकों से संभव हो गया है। उन्होंने कहा, इससे अब आगरा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को दिल्ली या अन्य महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह सरकारी चिकित्सा व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है।

रोटेटर कफ टियर क्या है?

कंधे के जोड़ को स्थिर रखने वाली चार प्रमुख मांसपेशियों — सुपरस्पिनेटस, इन्फ़्रास्पिनेटस, टेरेस माइनर और सब्सकेपुलरीस — के टेंडन के आंशिक या पूर्ण रूप से फटने को रोटेटर कफ टियर कहा जाता है।

ये हैं इसके मुख्य कारण

-बढ़ती उम्र के साथ टेंडन की कमजोरी।

-अचानक गिरने या झटका लगने से चोट।

-बार-बार ऊपर की दिशा में काम (जैसे पेंटर, खिलाड़ी आदि)।

-गलत पोस्चर या रक्त प्रवाह की कमी।

लक्षण: कंधे में लगातार दर्द, विशेषकर रात में या हाथ उठाते समय, कमजोरी, मूवमेंट में कठिनाई और क्लिक जैसी आवाज़ आना।

जोखिम समूह

-40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग।

-डायबिटीज़ व धूम्रपान करने वाले व्यक्ति।

-वे पेशेवर जिनके काम में कंधे का लगातार उपयोग होता है।

निदान और उपचार

चिकित्सकीय परीक्षणों के साथ एमआआरआई या अल्ट्रासाउंड से पुष्टि की जाती है। प्रारंभिक अवस्था में आराम, दवा, फिजियोथेरेपी या स्टेरॉयड इंजेक्शन से उपचार किया जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में आर्थ्रोस्कोपिक रोटेटर कफ रिपेयर सर्जरी की जाती है। यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र रिकवरी होती है।

एस.एन. मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों को भी अत्याधुनिक इलाज की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी।

SP_Singh AURGURU Editor