आगरा के सिपाहियों ने अपराधी चंद्रसेन का अपहरण-फिरौती में दिया था संग, बरेली कोर्ट ने दो को दी सजा
-आरके सिंह- बरेली/आगरा । शासन की आंखों में धूल झोंककर जनता की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले दो पुलिसकर्मियों को कोर्ट ने आखिरकार दोषी करार दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलका पांडेय की अदालत ने कुख्यात अपराधी चंद्रसेन को पुलिस कस्टडी से भगाने और फिर उसके साथ अपहरण और फिरौती वसूली में सहयोग करने के दोष में सिपाही कुंवरजीत सिंह व ज्ञान सिंह को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को छह-छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
-मामला वर्ष 2006 का, आगरा सेंट्रल जेल से कई जिलों में पेशी के लिए ले गये थे आगरा पुलिस लाइन के तत्कालीन चार सिपाही
-बाद में ये चारों सिपाही अपराधी चंद्रसेन के साथ हो गये थे फरार, कुख्यात का अपहरण और फिरौती वसूली में किया था सहयोग
इस हाई-प्रोफाइल केस की जानकारी देते हुए एसपीओ श्रीमती लवलेश सिंह ने बताया कि चंद्रसेन, वर्ष 2006 में आगरा की सेंट्रल जेल में बंद था। उसके खिलाफ शाहजहांपुर, कन्नौज, पीलीभीत और बरेली में कई गंभीर मुकदमे विचाराधीन थे। उसे पेशी के लिए चार सिपाहियों की सुरक्षा में विभिन्न जिलों में ले जाया गया। 3 दिसंबर 2006 को सेंट्रल जेल आगरा से ले जाया गया था। चार दिसंबर को शाहजहांपुर, पांच दिसंबर कन्नौज, छह दिसंबर को शाहजहांपुर, सात दिसंबर को पीलीभीत और आठ दिसंबर को बरेली की कोर्ट में चंद्रसेन को पेश किया जाना था।
आगरा पुलिस लाइन में तैनात सिपाही कुंवरजीत सिंह, अरब सिंह, शंकर लाल, कीतम सिंह और ज्ञान सिंह स्टेनगन, कई रायफलों और दर्जनों कारतूस लेकर इस अभियुक्त को आगरा सेंट्रल जेल से लेकर रवाना हुए थे। अधिकारियों को सूचना मिली कि 7 दिसंबर 2006 को चंद्रसेन पुलिसकर्मियों समेत फरार हो चुका है।
आगरा से चंद्रसेन को लेकर गये चारों सिपाहियों में से किसी ने भी वापस आगरा पुलिस लाइन में आमद दर्ज नहीं कराई। न ही चंद्रसेन को दोबारा जेल लाया गया। इस मामले की खबर शासन तक पहुंची। सिपाही कुंवरजीत और ज्ञान सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि चंद्रसेन ने पुलिसकर्मियों की मदद से अपहरण और फिरौती वसूली जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दिया। इस बाबत थाना कोतवाली में मु0अ0सं0 3671/2006 धारा-225A भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया था।
अभियोजन की ओर से 8 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने दो आरोपित सिपाहियों को दोषी पाया, जबकि अन्य सिपाहियों अरब सिंह, शंकर लाल और गीतम सिंह की पत्रावली अलग कर दी गई है, जिन पर सुनवाई जारी है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा- पुलिस पर समाज का भरोसा होता है। उसी की वजह से आम नागरिक चैन की नींद सोते हैं। जब सुरक्षा के जिम्मेदार ही अपराधियों से मिल जाएं, तो यह घोर अपराध है, जो किसी भी हालत में क्षमा योग्य नहीं है।
चूंकि ये सिपाही अपराधी चंद्रसेन के साथ बरेली से गायब हुए थे, इसलिए बरेली में ही इनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था।