तेंदुए से ज्यादा खतरनाक निकला एआई, एत्मादपुर में मची अफरा-तफरी, वायरल सीसीटीवी फोटो निकला फर्जी
आगरा। आगरा जिले के एत्मादपुर क्षेत्र में शनिवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब गांव में तेंदुआ दिखने की सूचना तेजी से फैल गई। इंटरनेट मीडिया पर एक फोटो वायरल की गई, जिसे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज बताया गया। फोटो में तेंदुए जैसा जानवर साफ नजर आ रहा था, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए।
वन विभाग–पुलिस की मशक्कत के बाद सच आया सामने
आगरा। आगरा जिले के एत्मादपुर क्षेत्र में शनिवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब गांव में तेंदुआ दिखने की सूचना तेजी से फैल गई। इंटरनेट मीडिया पर एक फोटो वायरल की गई, जिसे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज बताया गया। फोटो में तेंदुए जैसा जानवर साफ नजर आ रहा था, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए।
ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग और पुलिस तुरंत हरकत में आई। एहतियातन तेंदुआ पकड़ने के लिए इलाके में पिंजरा भी लगाया गया, साथ ही खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। लेकिन कुछ ही घंटों में इस पूरे मामले ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया।
जांच में खुला बड़ा सच
वन विभाग की तकनीकी जांच और विशेषज्ञों की पड़ताल में सामने आया कि वायरल की गई फोटो किसी भी सीसीटीवी कैमरे की नहीं, बल्कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जनरेट की गई फर्जी तस्वीर थी। फोटो में रोशनी, शैडो और बैकग्राउंड में कई ऐसे तकनीकी संकेत मिले, जो इसे वास्तविक नहीं बल्कि डिजिटल रूप से बनाई गई इमेज साबित करते हैं।
एआई का दुरुपयोग बना डर की वजह
अधिकारियों के मुताबिक यह मामला एआई के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है, जहां कुछ ही सेकंड में बनाई गई एक फर्जी तस्वीर ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया। यदि समय रहते सच्चाई सामने न आती, तो यह अफवाह किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती थी।
अफवाह फैलाने वाले की तलाश
फर्जी सूचना सामने आने के बाद वन विभाग और पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान और तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी फोटो या वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी आपात या संदिग्ध सूचना की पुष्टि संबंधित विभागों से करने के बाद ही आगे साझा करें, ताकि एआई के जरिए फैलने वाली अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।