एक दशक में कोविड से बड़ी महामारी बनेगा वायु प्रदूषण

बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों की जान ले रहा है। वायु प्रदूषण के कारण फेंफड़ों के कैंसर के मामलों मे बेतहाशा वृद्धि हुई है। मेदांता अस्पताल गुड़गांव के चेस्ट सर्जन डा. अरविंद कुमार के अनुसार जो लंग्स कैंसर पहले कुछ सिगरेट बीड़ी पीने वाले लोगों को होता था वह अब स्मोक न करने वाले लोगों , बच्चों तथा महिलाओं में सामने आ रहा है। यदि प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दस सालों में यह कोविड से बड़ी और घातक महामारी साबित होगा

Nov 16, 2024 - 15:19
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एक दशक में कोविड से बड़ी महामारी बनेगा वायु प्रदूषण

नई दिल्ली। अगले दस सालों में वायु प्रदूषण कोविड से भी बड़ी महामारी सिद्ध हो सकता है। यह कहना है  मेदांता के विख्यात चेस्ट सर्जन डा. अरविंद कुमार का। मेदांता में फेंफड़ा प्रत्यारोपण विभाग के चेयरमेन डा. अरविंद कुमार का कहना है कि आजकल यदि वह चार लोगों की चेस्ट का आपरेशन करते हैं तो उनमें से तीन के लंग्स काले दिखाई देते हैं, हालांकि वे स्मोक नहीं करते। 

डा. कुमार का कहना है कि सिगरेट न पीने वाले लोगों के लंग्स की इतनी खराब स्थिति देखने को मिल रही है जो पहले हैवी स्मोकर्स में दिखाई देती थी। इसका प्रमुख कारण हवा में दूसरे पौल्यूटेंट्स के साथ भारी खनिज कणों का होना है। यही कारण है कि संसार में आज वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड से मरने वाले लोगों की संख्या से ज्यादा है।

किसी मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण नहीं लिखा जाता। बढ़ते प्रदूषण के कारण ही लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सांस संबंधी बीमारियां तथा लंग्स कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। डा. कुमार का कहना है कि देश में लंबी बीमारियों से होने वाली मौतों में 95 प्रतिशत सहयोग वायु प्रदूषण का होता है। 


वहीं सर गंगाराम हास्पीटल के कार्डियोलाजी विभाग के चेयरमेन डा. पीएस साहनी कहते हैं कि देश में होने वाली कुल मौतों में एक तिहाई लोग प्रदूषण संबंधी रोग से मरते हैं। 

डा. अरविंद कुमार का कहना है कि आज फेंफड़े के कैंसर के मामले बढ़ गए हैं। देखने में आया हैकि इस कैंसर के आधे मरीज वे देखने को मिल रहे हैं जो स्मोक नहीं करते। पहले बड़ी आयु के लोग कैंसर के शिकार होते थे अब यह 30 से 40 साल तक के लोगों में देखने को मिल रहा है। और तो और महिलाओं में पहले लंग्स कैंसर नहीं होता था अब महिलाओं में भी यह देखने को मिल रहा है। 

डा. कुमार का कहना है कि बच्चों और बूढ़ों पर वायु प्रदूषण ज्यादा घातक प्रभाव डाल रहा है। बच्चों की श्वांस नली पतली होती है, वायु प्रदूषण के कारण उसमें होने वाली जरा सी सूजन सांस लेने की प्रक्रिया में बड़ी रुकावट बन जाती है और बच्चों को सांस लेने में परेशानी होना, निमोनिया और अस्थमा तक हो जाता है।

लंबे समय तक यदि बच्चे प्रदूषित वातावरण में रहते हैं तो उनके फेंफड़ों का विकास कम होता है जिससे पूरे जीवन उन्हें सांस संबंधी परेशानी उठानी पड़ती है। डा. कुमार का कहना है कि एन 95 मास्क या एअर प्यूरीफायर इसका उपाय नहीं है। कौन 24 घंटे 365 दिन मास्क लगा सकता है।

वायु प्रदूषण के कारणों को समाप्त करना ही इसका निदान है। समय रहते यदि इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा।