आगरा में पुलिसिया बर्बरता का आरोप, हिरासत में युवक को थर्ड डिग्री का मामला एनएचआरसी पहुंचा
आगरा। आगरा के थाना किरावली से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर पुलिस हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पर आरोप है कि पूछताछ के दौरान एक युवक को थर्ड डिग्री यातनाएं देकर उसके दोनों पैर तोड़ दिए गए। इस मामले को लेकर अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
स्वतंत्र जांच टीम, आपराधिक मुकदमा और पीड़ित को सुरक्षा की मांग
मानवाधिकार संगठनों ने कहा— केवल निलंबन नहीं, एफआईआर जरूरी
आगरा। आगरा के थाना किरावली से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर पुलिस हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पर आरोप है कि पूछताछ के दौरान एक युवक को थर्ड डिग्री यातनाएं देकर उसके दोनों पैर तोड़ दिए गए। इस मामले को लेकर अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आयोग से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र जांच टीम गठित की जाए। साथ ही पीड़ित के बयान दर्ज कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए तथा पीड़ित को समुचित इलाज और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
नरेश पारस के अनुसार, 5 जून 2025 को किरावली थाना क्षेत्र के गांव करहारा में 58 वर्षीय किसान वनवीर सिंह की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। इसी प्रकरण में राजू नामक युवक को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। आरोप है कि हत्या कबूल कराने के दबाव में पुलिस ने उसे दो दिन तक अवैध हिरासत में रखकर अमानवीय यातनाएं दीं।
पीड़ित राजू का आरोप है कि उसे थाने के एक कमरे में ले जाकर शाल से दोनों पैरों को बांधकर उल्टा लटका दिया गया। थाना प्रभारी नीरज कुमार की मौजूदगी में दो दरोगाओं और एक सिपाही ने बेरहमी से उसकी पिटाई की। उसके पैरों के तलवों पर डंडों से वार किए गए, जिससे चार लकड़ी के और एक प्लास्टिक का डंडा टूट गया। चीखने पर उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया और रातभर मारपीट की गई।
राजू का कहना है कि बेहोशी और पैरों में गंभीर सूजन आने के बाद पुलिस उसे किरावली के अस्पताल लेकर पहुंची, जहां जांच में दोनों पैरों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। वर्तमान में उसके दोनों पैरों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है। परिजनों के पहुंचने पर जब उसने पूरी आपबीती सुनाई, तब मामला सार्वजनिक हुआ और तूल पकड़ लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए एसीपी राम प्रवेश गुप्ता का तत्काल तबादला कर दिया है। वहीं एसओ नीरज कुमार, एक सब-इंस्पेक्टर धर्मवीर और सिपाही रवि मलिक को निलंबित किया गया है।
हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनका स्पष्ट कहना है कि पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री देना गंभीर अपराध है और इसमें दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी होनी चाहिए।
यह मामला एक बार फिर पुलिस हिरासत में होने वाले अत्याचार और जवाबदेही पर गहरा सवाल खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की जांच और उसकी आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।