पशुपालन विभाग में ‘स्थानान्तरण उद्योग’ का आरोप: नियमों की उड़ीं धज्जियां और निदेशक के अधिकारों का खुला अतिक्रमण, मंत्री से की गई शिकायत में जांच की मांग
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग में स्थानान्तरण नीति, शासनादेशों और विभागीय नियमों की खुलेआम अवहेलना का गंभीर आरोप सामने आया है। आगरा मंडल में समूह ‘ग’ संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानान्तरण और निरस्तीकरण में धनबल, राजनीतिक दबाव और दलाली के जरिए अनियमितताएं करने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे मामले की बिंदुवार, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
आगरा। उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर विभागीय संघ ने शासन स्तर तक शिकायत दर्ज कराई है। अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रमुख सचिव (पशुधन एवं मत्स्य), मंडलायुक्त आगरा मंडल तथा निदेशक (प्रशासन एवं विकास) पशुपालन विभाग को भेजे शिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, आगरा मंडल में स्थानान्तरण नीति और शासनादेशों को दरकिनार करते हुए समूह ‘ग’ संवर्ग के कर्मचारियों के स्थानान्तरण बिना उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के किए गये और फिर राजनीतिक दबाव व धनबल के आधार पर उन्हें निरस्त किया गया। आरोप है कि स्थानान्तरण नीति में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद कि नवीन तैनाती पर समय से कार्यभार ग्रहण न करने पर कर्मचारी स्वतः कार्यमुक्त माने जाएंगे, इसके उलट सौदेबाजी कर तबादले निरस्तीकरण किए गए।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रधान सहायक पद पर पदस्थापना/प्रोन्नति में अनुसूचित जाति के वरिष्ठतम कर्मचारी के अधिकारों का हनन कर उन्हें प्रोन्नति से वंचित रखा गया। यही नहीं, पशुधन प्रसार अधिकारियों (07 जनहित, 04 स्वयं अनुरोध), 03 वेटनरी फार्मासिस्ट (जनहित) और 02 वाहन चालकों के स्थानान्तरण हेतु निदेशक (प्रशासन एवं विकास) से अनुमोदन मांगा गया था, लेकिन सीमित अनुमोदन के बावजूद चहेते कर्मियों को लाभ पहुंचाया गया।
शिकायती पत्र में कहा गया है कि प्रमोद कुमार चाहर (पशुधन प्रसार अधिकारी, मलपुरा-आगरा) का बिना जांच प्रशासनिक आधार पर मथुरा स्थानान्तरण, फिर उसी स्थान पर निरस्तीकरण किया गया। निदेशालय से अनुमोदन नहीं लिया गया।
ओमप्रकाश कुन्तल (मगोर्रा-मथुरा) का इरादतनगर-आगरा में स्थानान्तरण किया गया। एक माह बाद निदेशालय की अनदेखी कर निरस्तीकरण कर दिया गया। इसी प्रकार सतेन्द्र सिंह व कौशलेन्द्र सिंह के परस्पर स्थानान्तरण दिव्यांग आधार के नाम पर किये गये। सोमवीर सिंह (इरादतनगर-आगरा) का स्वयं अनुरोध स्थानान्तरण किया गया। कुशल पाल सिंह का जनहित स्थानान्तरण सेवानिवृत्ति से पूर्व कर दूरस्थ तैनाती की गई।
सत्यपाल (वेटेरिनरी फार्मासिस्ट, शिकोहाबाद-फिरोजाबाद) का निदेशालय से अनुमोदित स्थानान्तरण पर अमल नहीं किया गया। अवधेश कुमार (वेटेरिनरी फार्मासिस्ट, मैनपुरी) का अनुमोदित स्थानान्तरण रोका गया। हरीबाबू (वेटेरिनरी फार्मासिस्ट, राय-मथुरा) का जनहित स्थानान्तरण, जिसमें निदेशालय आदेश की अवहेलना की गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रत्येक स्थानान्तरण में वसूली हुई। ऑफलाइन स्थानान्तरण कर मानव सम्पदा पोर्टल पर आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी में स्वीकृत पदों के सापेक्ष असंतुलन पैदा हुआ और आकांक्षी जनपद/खंडों में रिक्तियां बनी रहीं।
संघ ने मांग की है कि पूरे मामले की बिंदुवार जांच कराई जाए, साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु संघ पदाधिकारियों को जांच में शामिल किया जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह के कथित संगठित भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।