वृक्ष कटान का आरोप झूठा: सीईसी के सामने आगरा कॉलेज ने रखा ठोस पक्ष, 2000 पौधे रोपे जा चुके, 5000 का प्रस्ताव
आगरा। वृक्ष कटान को लेकर उठे आरोपों के बीच आगरा कॉलेज, आगरा ने सीईसी (सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी) के समक्ष अपना पक्ष मजबूती और तथ्यों के साथ रखा। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न तो किसी हरे वृक्ष का कटान हुआ और न ही किसी वन कानून का उल्लंघन किया गया। उल्टे, संस्थान ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
आगरा। आगरा कॉलेज, आगरा के प्राचार्य प्रोफेसर सी. के. गौतम शुक्रवार को दिल्ली में सीईसी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और कॉलेज से जुड़े प्रकरण में तथ्यात्मक, विधिक और प्रशासनिक स्थिति विस्तार से रखी।
प्राचार्य प्रो. गौतम ने समिति को अवगत कराया कि संबंधित कार्य के लिए आगरा कॉलेज की प्रबन्ध समिति द्वारा विधिवत प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव को मण्डलायुक्त, आगरा, जो प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष हैं, तथा जिलाधिकारी, आगरा जो उपाध्यक्ष हैं, के नेतृत्व में पूर्ण अनुमोदन प्राप्त हुआ। इसी स्वीकृत प्रस्ताव के आधार पर आगे की समस्त कार्यवाही की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का निर्माण या सफाई कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व सक्षम प्राधिकरणों द्वारा दो बार स्थलीय निरीक्षण (मौका मुआयना) कराया गया था। वन विभाग द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कार्य स्थल पर कोई भी हरा या संरक्षित वृक्ष मौजूद नहीं था। स्थल पर केवल छोटी झाड़ियां और झाड़-झंखाड़ पाए गए, जो उत्तर प्रदेश प्रोटेक्शन ऒफ ट्री एक्ट 1976 के अंतर्गत वृक्ष की श्रेणी में नहीं आते।
प्राचार्य ने बताया कि वन विभाग से विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद ही झाड़ियों की सफाई और बाउंड्री निर्माण का कार्य किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी वृक्ष का कटान या पातन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परिसर में मौजूद बड़े वृक्षों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया तथा जहां आवश्यकता पड़ी, वहां बाउंड्री को वृक्षों के अनुरूप घुमाते हुए निर्मित किया गया।
कॉलेज प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि आगरा कॉलेज, आगरा की निजी/कैम्पस भूमि है, जो किसी भी प्रकार के आरक्षित, संरक्षित या अधिसूचित वन क्षेत्र की श्रेणी में नहीं आती।
महिला सुरक्षा और परिसर की सुरक्षा को प्रमुख कारण बताते हुए प्राचार्य ने कहा कि झाड़ियों की सफाई अत्यंत आवश्यक थी। झाड़-झंखाड़ के कारण विषैले जीव-जंतुओं और असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता था, विशेषकर महिला छात्रावास और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रो. गौतम ने सीईईसी को बताया कि आगरा कॉलेज द्वारा अब तक लगभग 2000 पौधों का वृक्षारोपण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 5000 से अधिक पौधों के वृक्षारोपण का प्रस्ताव स्वीकृत किया जा चुका है। नव-निर्मित बाउंड्री से सटे लगभग 900 मीटर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है।
कॉलेज प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि संस्थान में स्वच्छता एवं पर्यावरण समिति नियमित रूप से सक्रिय है, जो वृक्षारोपण, पौधों की देखरेख और हरित परिसर के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
अंत में प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने कहा कि आगरा कॉलेज, आगरा एक शताब्दी से अधिक पुरानी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था है, जो शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है। भविष्य में भी कॉलेज के सभी कार्य विधि और पर्यावरणीय मानकों के पूर्ण अनुपालन में ही किए जाएंगे।