आगरा के सीवीओ कार्यालय के कथित गबन की जांच नहीं हो रही, डिप्लोमा वेटरिनेरियन एसोसिएशन ने पशुधन मंत्री से की शिकायत
आगरा। आगरा के सीवीओ कार्यालय (पशुपालन विभाग) में कथित भ्रष्टाचार और 25 लाख रुपये के गबन की जांच, मंडलायुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद शुरू न होने पर अब डिप्लोमा वेटरिनेरियन एसोसिएशन ने मामला मंत्री के स्तर पर उठाया है। संघ ने प्रदेश के पशुधन मंत्री से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
डिप्लोमा वेटरिनेरियन एसोसिएशन ने आगरा के सीवीओ कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार और 25 लाख रुपये के गबन के प्रकरण को लेकर प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्म पाल सिंह से शिकायत की है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा ने आगरा के दौरे पर आए मंत्री धर्मपाल सिंह से सर्किट हाउस में मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि संघ की शिकायत पर आगरा के मंडलायुक्त ने 4 अक्तूबर को जिलाधिकारी को आदेशित किया था कि एडीएम के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराई जाए तथा टीम में लेखा सेवा के अधिकारी को भी शामिल किया जाए।
संघ का आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद अब तक न तो जांच समिति का गठन हुआ है और न ही संघ को कोई सूचना दी गई है। संघ ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि सीवीओ आगरा डॉ. डी.के. पांडे द्वारा जिलाधिकारी को संबोधित एक पत्र में, आईजीआरएस शिकायत के निस्तारण के दौरान लिखित रूप से स्वीकार किया गया है कि 25 लाख रुपये के गबन के कथित षड्यंत्र में तत्कालीन लेखाकार ज्ञानेंद्र भारद्वाज तथा तत्कालीन सीवीओ और वर्तमान में डिप्टी सीवीओ एत्मादपुर, आगरा डॉ. जयंत यादव दोषी हैं।
संघ ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में डॉ. डी.के. पांडे की भूमिका मार्गदर्शक की रही है। संघ के अनुसार, कैशबुक में की गई गड़बड़ियों से इस बात की पुष्टि होती है, जबकि कोषागार से प्राप्त रीकन्साइलेशन बिलों से भी अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी सामान की खरीद-फरोख्त जिला क्रय समिति की स्वीकृति के बिना किए जाने का आरोप लगाया गया है। संघ का कहना है कि खरीद और वितरण दोनों कागजों पर ही दर्शाए गए, जबकि जमीनी स्तर पर वितरण संदिग्ध है।
शिकायती पत्र में संघ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा लंबित आदेशों के तत्काल अनुपालन की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलनात्मक कदम उठाने पर मजबूर होगा।