अद्भुत संयोग: पितृपक्ष का चंद्र ग्रहण से प्रारंभ और सूर्यग्रहण से होगा समापन, जानिए राशियों पर प्रभाव

इस बार बड़ा अद्भुत संयोग है। इस बार पितृपक्ष का आरंभ जहां चंद्रग्रहण से हो रहा है, वहीं इसका समापन 21 सितम्बर को सूर्यग्रहण से होगा। आज रविवार (सात सितंबर 2025) से प्रारंभ हुए पितृपक्ष के पहले ही दिन चंद्र ग्रहण का योग बना है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और कुंभ राशि में यह चंद्र ग्रहण लग रहा है। ग्रहण का होना एक पूर्ण ज्योतिषीय घटना होती है, जिसका प्रभाव समस्त चराचर विश्व पर पड़ता है।

Sep 7, 2025 - 09:15
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अद्भुत संयोग: पितृपक्ष का चंद्र ग्रहण से प्रारंभ और सूर्यग्रहण से होगा समापन, जानिए राशियों पर प्रभाव

चंद्र ग्रहण के सूतक ग्रहण के लगने से 9 घंटे पहले लगते हैं। 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण के सूतक मध्याह्न 12:57 बजे से प्रारम्भ होंगे। ग्रहण का प्रारम्भ काल रात्रि 09:57 बजे से मध्य काल रात्रि 11:43 बजे तक और मोक्ष अथवा समापन काल अर्द्ध रात्रि 01:26 बजे होगा।

यह ग्रहण संपूर्ण भारत में दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप, एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण रक्तवर्ण से युक्त होगा, जो कि कई वर्षों में एक बार होता है। वृद्ध, बालक और बीमार लोगों को इन सूतकों से मुक्ति रहती है। ग्रहण के सूतक से लेकर ग्रहण की अवधि पर्यंत कुछ शास्त्रीय विशेष नियमों का पालन करना होता है।  इनमें भोजन नहीं करना, मैथुन नहीं करना, शयन नहीं करना तथा शौच व मूत्र का त्याग नहीं करना शामिल होता है। क्योंकि सोने से रोग, मैथुन करने से गांव का शूकर बनना, भोजन करने से दुख प्राप्त होना, शौच व मूत्र करने से कृमि बनना आदि पाप की प्राप्ति होती है।

जितने समय ग्रहण हो, उतने समय में किसी भी एक मंत्र का अगर जाप किया जाए तो उसका अनंतगुणा फल प्राप्त होता है, जिससे वह मंत्र का पुरुश्चरण पूरा माना जाता है। किसी भी एक मंत्र का हवन कर सकते हैं। जाप कर सकते हैं। भगवान नाम का संकीर्तन कर सकते हैं। किसी एक स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं अथवा गुरु के द्वारा दिए गए मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। ग्रहण काल में मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों का स्पर्श नहीं किया जाता है।

सिद्ध स्थान, नदियों के तट, जलाशयों और मंदिरों में किया गया जप अनंतगुणा फलदायक होता है। ग्रहण प्रारंभ होने पर वस्त्रों सहित स्नान करना चाहिए। उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके जाप करें और तत्पश्चात ग्रहण पूर्ण होने पर स्नान करें तथा वस्तुओं का जो भी दान करना है, वह करें। गर्भिणी स्त्रियों को ग्रहण काल में बाहर नहीं निकलना चाहिए। जो गर्भिणी पशु हैं, उनको भी बाहर नहीं होना चाहिए। इस काल में कोई भी नवीन कार्य करने से बचना चाहिए।

आज होने वाले चंद्रग्रहण का राशिय़ों पर भी प्रभाव होगा

मेष – सुख की प्राप्ति और धन लाभ।

वृषभ – स्वास्थ्य सुख व धन लाभ।

मिथुन – मन में भय रहेगा।

कर्क – कष्ट मिलेगा।

सिंह – मनोविकार व अशांति।

कन्या – रोजगार में लाभ।

तुला – यात्रा से लाभ।

वृश्चिक – चिंताजनक और नेष्ट।

धनु – चिंताओं से मुक्ति।

मकर – धन का खर्च बढ़ेगा।

कुंभ – कष्ट एवं हानिकारक।

मीन – अपमान एवं दुखकारक।

भारतीय परिदृश्य और प्राकृतिक प्रभाव

ग्रहण का फल भारतीय परिदृश्य में देखें तो विशिष्टों को चिंता होगी। आपसी कलह बढ़ेगा, रोग और संताप की प्राप्ति होगी।

प्रकृति में अत्यधिक वर्षा, हिमपात, आंधी, तूफान, झंझावत आदि का कोप, भू-स्खलन तथा अग्नि-अस्त्र-शस्त्र से जनधन हानि का कुयोग बन रहा है।

आर्थिक प्रभाव

सरसों, अरहर, मसूर, तांबा, सोना-चांदी इत्यादि वस्तुओं में बढ़त रहेगी।

विश्व परिदृश्य

देशों में आपसी कलह रहेगी। एक-दूसरे को हराने और अपनी ताकत बढ़ाने की प्रवृत्ति अधिक होगी।

SP_Singh AURGURU Editor