एएमयू मनोविज्ञान विभाग विवाद पहुंचा अदालत की चौखट पर, विभागाध्यक्ष प्रो. शाह आलम को मिली ज़मानत
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मनोविज्ञान विभाग में पिछले एक वर्ष से चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले में आरोपी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शाह आलम को अदालत ने ज़मानत दे दी है, जिससे विभाग में महीनों से चली आ रही तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है।
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मनोविज्ञान विभाग में पिछले एक वर्ष से चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले में आरोपी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शाह आलम को अदालत ने ज़मानत दे दी है, जिससे विभाग में महीनों से चली आ रही तनातनी एक बार फिर सुर्खियों में है।
सूत्रों के अनुसार नवंबर 2024 में विभागाध्यक्ष प्रो. शाह आलम और प्रोफेसर एस.एम. खान के बीच कथित विवाद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू की और जांच रिपोर्ट में प्रो. शाह आलम को दोषी माना।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की।
कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद मिली ज़मानत
चार्जशीट दाखिल होने के बाद प्रो. शाह आलम ने 29 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें अदालत में पेश की गईं। सभी तर्क सुनने के पश्चात अदालत ने प्रो. शाह आलम को ज़मानत प्रदान की। ज़मानत की प्रक्रिया में एएमयू के प्रो. दस्तगीर आलम और प्रो. मसूम रज़ा ने जमानतदार के रूप में भूमिका निभाई।
पुलिस जांच और विभागीय असर
मामले की पुलिस जांच अभी जारी है।
विवि सूत्रों के अनुसार, विभाग में पिछले एक वर्ष से इस विवाद के चलते शैक्षणिक माहौल पर भी असर पड़ा है।
विभागीय बैठकों और शिक्षण कार्यों में तनाव का वातावरण बताया जा रहा है।
पृष्ठभूमि: विभाग में बढ़ी खींचतान
मनोविज्ञान विभाग के इस विवाद ने एएमयू परिसर में प्रशासनिक और शिक्षण स्तर पर गुटबाज़ी की चर्चा को भी हवा दी है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद विभाग में स्थिति शांत बताई जा रही है, परंतु विवि समुदाय की नज़रें अब पुलिस रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं।