रामसेतु पर एएसआई का स्पष्ट जवाब, ‘राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक नहीं’, संरक्षण का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं

एएसआई मुख्यालय ने आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि रामसेतु राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक नहीं है और इसके संरक्षण का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। आगरा निवासी डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य द्वारा 13 जनवरी 2026 को दायर आरटीआई पर 17 फरवरी को जवाब दिया गया। एएसआई ने यह भी स्पष्ट राय नहीं दी कि रामसेतु प्राकृतिक संरचना है या मानव निर्मित।

Feb 18, 2026 - 18:02
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रामसेतु पर एएसआई का स्पष्ट जवाब, ‘राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक नहीं’, संरक्षण का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं
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आगरा। धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहने वाले रामसेतु को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने स्पष्ट किया है कि इसे राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया गया है। साथ ही, इसके संरक्षण को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव भी लंबित नहीं है। यह जानकारी आगरा निवासी डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में दी गई है।

एएसआई मुख्यालय का आधिकारिक जवाब

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के मुख्यालय ने 13 जनवरी 2026 को दाखिल आरटीआई आवेदन पर 17 फरवरी 2026 को जवाब देते हुए बताया कि रामसेतु को ‘राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक’ घोषित नहीं किया गया है। एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में इसे संरक्षित स्मारक घोषित करने अथवा इसके संरक्षण से संबंधित कोई प्रस्ताव उनके पास विचाराधीन नहीं है।

क्या प्राकृतिक है या मानव निर्मित?

आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि रामसेतु प्राकृतिक संरचना है या मानव निर्मित। इस प्रश्न पर एएसआई ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी। विभाग ने इस विषय पर टिप्पणी करने से परहेज किया, जिससे इस मुद्दे पर जारी बहस यथावत बनी हुई है। ध्यान रहे कि रामसेतु, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Adam's Bridge के नाम से जाना जाता है, भारत के तमिलनाडु तट से श्रीलंका तक फैली एक शृंखला के रूप में समुद्र में दिखाई देता है। इसे हिंदू परंपरा में भगवान राम की लंका यात्रा से जोड़ा जाता है।

एएसआई से सामने आई स्थिति

आगरा निवासी डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने 13 जनवरी 2026 को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर रामसेतु की वर्तमान आधिकारिक स्थिति के संबंध में जानकारी मांगी थी।
करीब एक महीने बाद 17 फरवरी को एएसआई मुख्यालय से प्राप्त उत्तर में स्पष्ट किया गया कि रामसेतु राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक नहीं है। संरक्षण संबंधी कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। इसकी प्रकृति (प्राकृतिक या मानव निर्मित) पर कोई औपचारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं कराई गई।

बहस को नया आयाम

एएसआई के इस जवाब के बाद रामसेतु को लेकर चल रही बहस को नया आयाम मिल सकता है। एक ओर जहां इसे सांस्कृतिक-धार्मिक धरोहर मानकर संरक्षण की मांग उठती रही है, वहीं दूसरी ओर इसे भू-वैज्ञानिक संरचना मानने वाले विशेषज्ञ भी हैं। फिलहाल, आधिकारिक स्थिति यही है कि रामसेतु को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त नहीं है और इस दिशा में कोई प्रक्रिया जारी नहीं है।