कम से कम बेजुवान जानवरों पर तो रहम करो वेटनरी की दवाओं पर मारे छापे पर उठ रहे सवाल

नकली दवा माफिया के निशाने पर अब जानवर भी हैं। जानवर बता भी नहीं पाते कि दवा असर कर रही है अथवा नहीं । इसलिए इन दवाओं में मिलावट लंबे समय तक पकड़ में नहीं आती। ड्रग विभाग छापे की कार्रवाई महज खानापूरी के लिए करके अपना चेहरा साफ कर लेता है।

Nov 8, 2024 - 16:21
Nov 8, 2024 - 16:54
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कम से कम बेजुवान जानवरों पर तो रहम करो वेटनरी की दवाओं  पर मारे छापे पर उठ रहे सवाल


आगरा। नकली दवा माफिया के निशाने पर अब जानवर हैं। जानवरों की दवाओं में जमकर मिलावट चल रही है। बेजुवान जानवर बता भी नहीं पाता कि दवा असर नहीं कर रही। औषधि विभाग भी इन मिलावट की दवाओं को रोकने के नाम पर छापे की खानापूरी कर रहा है। 
बाजार के सूत्रों का दावा है गुरुवार को ड्रग विभाग ने संतसुरी मार्केट फुव्वारा पर दुर्गा मेडीकल के यहां छापे की कार्रवाई की। आगरा और आगरा से बाहर के कई ड्रग निरीक्षकों ने दोपहर  दो बजे से रात आठ बजे तक चली कार्रवाई में दवाओँ के सैंपल लिए।

 ड्रग  विभाग अब इन सैंपल की संख्या केवल 12 बता रहा है। एडीसी ड्रग अतुल उपाध्याय का कहना है कि सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

 वहीं बाजार में इस छापे को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। बाजार के सूत्रों की मानें तो दुर्गा मेडीकल स्टोर से लगभग चार दर्जन से अधिक दवाओं को नमूने के लिए लिया गया। इनमें से अधिकांश दवाएं नकली थीं जिनके बिल दवा विक्रेता नहीं दिखा सका।

इन सभी दवाओं को अगर जांच के लिए भेजा जाता तो निश्चित रिपोर्ट में नकली दवा की पुष्टि होती। बाजार के सूत्रों का कहना है कि छह घंटे में क्या केवल 12 सैंपल ही लिए गए। 12 सैंपल तो  एक घंटे में ले लिए जाते। बाकी के पांच घंटे टीम क्या करती रही। 

बाजार के सूत्रों का कहना है कि छापे के बाद अक्सर यही होता है कि सेटिंग हो जाती है तो उन दवाओं के सैंपल जांच को भेज दिए जाते हैं जिनके बिल दवा विक्रेता के पास एक नंबर के होते हैं। बाजार के लोगों का कहना है कि बिल से खरीदी गई दवाएं नकली नहीं होतीं।

नकली का खेल बिना बिल की दवाओं में ही होता है। बाजार के सूत्र बताते हैं कि अब सभी सैंपल जांच में पास हो जाएंगे क्योकि वे बिल से खरीदी गई दवाएं हैं।