सुशासन और साहित्य को समर्पित रहा अटल जयंती शताब्दी समापन समारोह, विवि में गूंजे विचार और कविता
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषाविज्ञान विद्यापीठ में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती एवं जन्म शताब्दी वर्ष के समापन को अत्यंत गरिमामय और प्रेरणादायी वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक, बौद्धिक और साहित्यिक गतिविधियों की एक सशक्त श्रृंखला आयोजित की गई।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषाविज्ञान विद्यापीठ में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती एवं जन्म शताब्दी वर्ष के समापन को अत्यंत गरिमामय और प्रेरणादायी वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक, बौद्धिक और साहित्यिक गतिविधियों की एक सशक्त श्रृंखला आयोजित की गई।
यह समस्त आयोजन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण एवं निर्देशन में तथा संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अटल जी के विचारों, उनके सुशासन के दर्शन और साहित्यिक चेतना से जोड़ना रहा।
विद्यापीठ के सूर कक्ष में आवासीय इकाई के विद्यार्थियों के लिए “सुशासन का महत्व” विषय पर भाषण प्रतियोगिता तथा अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन और उनकी चर्चित कविताओं पर आधारित एकल काव्यपाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। दोनों प्रतियोगिताओं में 40 से अधिक विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, आत्मविश्वास और वैचारिक परिपक्वता के साथ सहभागिता की।
अपने प्रेरक उद्बोधन में संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का पवित्र मार्ग थी। उन्होंने अटल जी के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि सुशासन का अर्थ जनता की समस्याओं का ईमानदारी और समयबद्ध समाधान है। अटल जी की राजनीति संवाद, सहमति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर आधारित थी, जो आज भी सुशासन की सबसे सशक्त मिसाल है।
भाषण प्रतियोगिता की निर्णायक डॉ. राजश्री (केंद्रीय हिंदी संस्थान) ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के विचार समय की सीमाओं से परे हैं। सुशासन सप्ताह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कर्तव्यबोध, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के प्रति नवीनीकरण का अवसर है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना ही अटल जी की शासन-शैली की आत्मा थी।
दूसरी निर्णायक डॉ. रमा ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की चेतना को रेखांकित किया और अटल जी की सादगी, संवेदनशीलता और साहित्यिक दृष्टि को वर्तमान राजनीति के लिए अनुकरणीय बताया।
भाषण प्रतियोगिता में अतुल (बी.ए., आर्ट्स) ने प्रथम, रोहित प्रजापति (बी.ए., आर्ट्स) ने द्वितीय तथा सत्यम (एम.ए., संस्कृत) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वहीं काव्यपाठ प्रतियोगिता में राधा (एम.ए., भाषाविज्ञान) प्रथम, तृप्ती माहेश्वरी (एम.ए., हिंदी) द्वितीय एवं अंकित परमार (एम.ए., हिंदी) तृतीय स्थान पर रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वर्षा रानी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।
समापन अवसर पर यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि यह आयोजन न केवल अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों और साहित्यिक विरासत को विद्यार्थियों तक पहुँचाने का माध्यम बना, बल्कि उन्हें सुशासन, राष्ट्रसेवा और नैतिक राजनीति के प्रति प्रेरित करने का भी सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।