अटल स्मृति साहित्य पर्व: अटलांजलि में कविता, संस्कृति और राष्ट्रभाव का सशक्त संगम
आगरा। मातृभाषा हिंदी को समर्पित देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मोत्सव पूर्व संध्या एवं जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर अटल स्मृति साहित्य पर्व – अटलांजलि का आयोजन बुधवार को हुआ। वरिष्ठ कवयित्री राज फौजदार के आवास पर हुआ यह कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसे नंदनंदन गर्ग (प्रांतीय महामंत्री, संस्कार भारती, ब्रज प्रांत, आगरा) ने संपन्न किया। सरस्वती वंदना रमा वर्मा ने सुमधुर स्वर में प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेन्द्र मिलन (सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, भारत सरकार) ने अटल जी के विराट व्यक्तित्व और बहुआयामी कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें शब्दों का साधक, राजनीति में शुचिता का प्रतीक और राष्ट्रवाद का सशक्त स्वर बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी की कविता और राजनीति, दोनों में मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात ब्रज कवि ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने अटल बिहारी वाजपेयी को महामानव की संज्ञा देते हुए उनके विचारों की कालजयी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व भारतीय लोकतंत्र और साहित्य, दोनों के लिए प्रेरणास्रोत है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुषमा सिंह ने अटल जी के कुशल, दूरदर्शी और राष्ट्रहितैषी कार्यकाल की चर्चा करते हुए उनके शासनकाल को स्थिरता, संवाद और समन्वय का काल बताया।
कार्यक्रम का संचालन कवि डॉ. यशोयश ने किया। उन्होंने अटल जी को समर्पित काव्य-पंक्तियों के माध्यम से श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। चेहरे पर मुस्कान अटल हूं, दिल का हर फरमान अटल हूं…। जैसी पंक्तियों ने सभागार में गूंजते राष्ट्रभाव को और प्रगाढ़ किया।
आयोजन की संयोजिका राज फौजदार एवं अशोक फौजदार ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं ने अटल जी के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।