बक़रीद पर दिखावे से बचें, कुर्बानी को बनाएं सादगी और समर्पण का प्रतीक: दरगाहे आला हज़रत की अपील
बरेली। दरगाहे आला हज़रत बरेली की ओर से मुस्लिम समाज के लिए एक महत्वपूर्ण अपील जारी की गई है, जिसमें बुजुर्ग धार्मिक नेता तौसीफ मियां ने बक़रीद के अवसर पर सादगीपूर्ण कुर्बानी की वकालत की है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी इस्लाम का अहम रुख़ है, जो इंसान में अल्लाह और रसूल की रज़ा के लिए हर प्रकार की त्याग भावना को जन्म देती है।
-तौसीफ मियां ने कहा— कुर्बानी का इस्लामी उद्देश्य समझें, नुमाइश नहीं इबादत बनाएं
सोशल मीडिया पर नुमाइश से परहेज़ करें
तौसीफ मियां ने कहा कि कुर्बानी दिखावे, एक-दूसरे से मुकाबले और सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता और त्याग की भावना के लिए होती है। उन्होंने अपील की कि कुर्बानी के जानवरों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें, क्योंकि इससे कुर्बानी का वास्तविक उद्देश्य खो जाता है।
स्वच्छता और सौहार्द का भी रखें ध्यान
उन्होंने कहा कि इस्लाम साफ़-सफ़ाई पर विशेष बल देता है, इसलिए कुर्बानी के अवशेष सड़कों पर न फेंकें, बल्कि उन्हें सुनसान जगह पर गड्ढा खोदकर सम्मानपूर्वक दफन करें। ईद सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आपसी सौहार्द और भाईचारे को मज़बूत करने का अवसर है। देश में प्रेम और एकता के माहौल को बनाए रखना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है।
तौसीफ मियां ने यह भी कहा कि गोश्त का वितरण गरीबों में ईमानदारी से करें, न कि सारा स्टोर कर केवल स्वार्थ सिद्ध करें। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि अपने अमल से इस्लाम की सच्ची तस्वीर पेश करें।