बलोच नेता मीर यार ने कहा- बलूचिस्तान अटल बिहारी वाजपेयी को भूल नहीं सकता
मीर यार पाकिस्तानी सरकार और सेना के कट्टर विरोधी है। वह बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग देश बनाने पर जोर देते हैं।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटहल बिहारी वाजपेयी को याद किया है। गुरुवार को वाजपेयी की 101वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए मार यार ने कहा कि वह एक शानदार नेता थे, जिन्होंने अपनी एक बेहतरीन विरासत छोड़ी है। बलूचिस्तान के लोग खासतौर से अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हैं और उनकी विरासत का सम्मान करते हैं। मीर यार लगातार भारत के नेताओं को अपने सोशल मीडिया पर याद करते रहे हैं। वहीं पाकिस्तानी आर्मी और सरकार की वह कड़ी मुखालफत करते हैं।
मीर यार ने अपने एक्स पर भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में शामिल वाजपेयी का फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'आज 25 दिसंबर 2025 को बलूचिस्तान गणराज्य के लोग दुनियाभर के लाखों लोगों के साथ मिलकर अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहे हैं। वह एक ऐसे राजनेता थे, जिनका जीवन ईमानदारी, शालीनता और अपने देश के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिभाषित था।'
मीर यार ने आगे लिखा कि अटल बिहारी वाजपेयी सच बोलते थे, ईमानदारी से काम करते थे और राजनीति को एक कवि की आत्मा की गरिमा के साथ निभाते थे। दोस्तों और विरोधियों के साथ समान रूप से काम करने की उनकी क्षमता ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में एक दुर्लभ व्यक्ति बनाया। उनका सम्मान सिर्फ शक्ति के लिए नहीं बल्कि चरित्र, विनम्रता और नैतिक शक्ति के लिए किया जाता था।
मीर यार बलूच ने अपने पोस्ट के आखिर में कहा, 'वाजपेयी के जन्मदिन पर बलूचिस्तान गणराज्य के लोग उनकी स्थायी विरासत का सम्मान करते हैं। यह इस बात की याद दिलाता है कि महान नेता कभी सच में खत्म नहीं होते। उनके मूल्य पीढ़ियों को राह दिखाते रहते हैं। वह इतिहास में विवेक, ज्ञान, ईमानदारी और साहस से भरे भविष्य की आशा में जीवित रहते हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के जानेमाने राजनेताओं में से एक नाम हैं। वाजपेयी राजनीति के क्षेत्र में करीब पांच दशकों तक सक्रिय रहे। वह लोकसभा में नौ बार और राज्यसभा में दो बार सांसद चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी 1980 में गठित भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष थे।
अटल बिहारी वाजपेयी 1996 से 2004 तक तीन दफा देश के प्रधानमंत्री बने। पीएम के अलावा वाजपेयी विदेश मंत्री, संसद की कई अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थायी समितियों के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता भी रहे। वाजपेयी को साल 2015 में सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।