पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग पर आगरा में बैंककर्मियों का जोरदार प्रदर्शन, हड़ताल से करोड़ों का लेन-देन प्रभावित
आगरा में यूएफबीयू के आह्वान पर अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का व्यापक असर रहा। सभी तरह के बैंकों में कामकाज ठप रहा और क्लियरिंग बंद होने से यूपी भर में करोड़ों का लेन-देन अटक गया। बैंककर्मियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग, सभी शनिवार अवकाश और कार्यभार कम करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर सार्वजनिक, निजी व सहकारी बैंकों में हड़ताल, क्लियरिंग ठप होने से यूपी भर में चेक अटके
आगरा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर आज अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। यह हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों में भी लागू रही। हड़ताल के चलते क्लियरिंग हाउस में काम पूरी तरह ठप रहा, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश में चेक क्लियर नहीं हो सके और करोड़ों रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।
आगरा में बैंक कर्मचारी और अधिकारियों ने संजय प्लेस स्थित एलआईसी बिल्डिंग पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बैंककर्मी शामिल हुए और सभी ने एक स्वर में बैंकिंग उद्योग में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की। कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की।
आईबॉक के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित सहगल ने कहा कि यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर की गई है। उन्होंने बताया कि प्रमुख मांगों में बैंकिंग उद्योग में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करना और कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार को कम करना शामिल है।
यूएफबीयू आगरा के संचालक गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कमजोर कर उनके जनहितकारी उद्देश्य को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के द्विपक्षीय समझौतों और 7 दिसंबर 2023 को हुए समझौते में पांच दिवसीय बैंकिंग की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत बैंक दूसरे और चौथे शनिवार को ही बंद रहते हैं, जबकि आईबीए के साथ हुए समझौते के अनुसार सभी शनिवारों को बैंक बंद होने थे। समझौते को काफी समय बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे भेदभाव और कर्मचारियों की उपेक्षा के विरोध में है। यूनियनों ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए बैंकिंग सेवाओं में हुई असुविधा के लिए खेद भी प्रकट किया।
प्रदर्शन के दौरान पंकज शर्मा, राजेश शर्मा, शैलेन्द्र झा, होशियार सिंह सहित कई वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। इस मौके पर सागर गुजराती, मयंक सिंह, नीरज कुमार, आशीष राजपूत समेत बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी मौजूद रहे।