बरेली में बैंक लोन घोटाला: ऋण अधिकारी और पति की मिलीभगत से फर्जी फर्म ने हड़पे 2.25 करोड़
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बहेड़ी शाखा से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महिला ऋण अधिकारी, उसके पति और दो अन्य लोगों ने फर्जी फर्म बनाकर बैंक से 2 करोड़ 25 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया और रकम निजी खाते में ट्रांसफर कर दी। इस मामले में बैंक की चीफ मैनेजर जूली सिंह की तहरीर पर बहेड़ी थाना पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी फर्म ‘इलेक्ट्रॉनिक प्लाजा’ के नाम पर मिली भारी रकम
एसएसई एसबीआई बाईपास बहेड़ी शाखा की चीफ मैनेजर जूली सिंह ने बताया कि मदीना मस्जिद के पास निवासी अफसाना और अमन हुसैन ने मिलकर ‘इलेक्ट्रॉनिक प्लाजा’ नाम की फर्जी फर्म बनाई और बैंक अधिकारी साक्षी सिंह व उनके पति शिवम अग्रवाल से मिलीभगत कर 29 मार्च 2024 को 2.25 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया। इन लोगों ने यह दावा किया कि उन्हें वैल्यू प्लस कंपनी की डीलरशिप मिल चुकी है और वे इलेक्ट्रॉनिक सामानों का व्यवसाय शुरू करने जा रहे हैं।
फर्जी एजेंसी और ट्रांसफर की गई रकम
बैंक को बाद में ईमेल के माध्यम से जानकारी मिली कि वैल्यू प्लस ने बरेली में ‘इलेक्ट्रॉनिक प्लाजा’ नामक किसी फर्म को डीलरशिप नहीं दी है। इससे साफ हो गया कि आरोपियों ने झूठे दस्तावेजों के आधार पर बैंक को गुमराह किया। इतना ही नहीं, लोन की राशि विशाल कम्यूनिकेशन नामक खाते में भेजी गई, जो शिवम अग्रवाल की एक अन्य फर्म है। 3 अप्रैल 2024 को 1.26 करोड़ रुपये और 15 अक्टूबर 2024 को 1.60 करोड़ रुपये इस खाते में ट्रांसफर किए गए।
बिना जमानत, बिना सुरक्षा लिया गया ऋण
एफआईआर में कहा गया है कि बैंक अधिकारी साक्षी सिंह ने बिना किसी गारंटी, सिक्योरिटी व वैध कागजातों के इस भारी-भरकम ऋण को स्वीकृति दी। आरोप है कि यह पूरा लोन साक्षी सिंह और उनके पति की साझी साजिश का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने फर्जी कागजात तैयार करवाए और धन को ट्रांसफर कर गबन कर लिया।
थाना बहेड़ी में दर्ज हुई एफआईआर, जांच जारी
बहेड़ी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह तोमर के अनुसार, चीफ मैनेजर की तहरीर पर अफसाना, अमन हुसैन, साक्षी सिंह और शिवम अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
अंदरूनी मिलीभगत से बैंक को करोड़ों का नुकसान
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि ‘इलेक्ट्रॉनिक प्लाजा’ के दोनों पार्टनर विशाल कम्यूनिकेशन में पहले से कर्मचारी रह चुके हैं। यानि पूरी साजिश एक सुनियोजित तरीके से की गई जिसमें बैंक की आंतरिक सुरक्षा और नियमन प्रक्रियाओं को दरकिनार कर इतनी बड़ी रकम हड़प ली गई।