बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आंबेडकर विवि के तीन लॉ कॉलेजों में प्रवेश पर लगाई रोक, तीनों आगरा के

आगरा। आज अपने 77वें स्थापना दिवस पर एक ओर नेशनल चैंबर द्वारा यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से आगरा में लॉ शिक्षा के लॊ यूनिवर्सिटी की स्थापना की वकालत की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आगरा के डॊ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन लॉ कॉलेजों में 2025-26 सत्र के लिए प्रवेश पर रोक लगा दी है।

Jul 30, 2025 - 22:08
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आंबेडकर विवि के तीन लॉ कॉलेजों में प्रवेश पर लगाई रोक, तीनों आगरा के

बीसीआई ने देश के 11 लॉ कॉलेजों में प्रवेश पर रोक लगाई है, जिसमें से तीन आगरा और एक अलीगढ़ का कॉलेज भी है। यह रोक बार काउंसिल की उच्च स्तरीय निरीक्षण समिति की रिपोर्ट के आधार पर लगाई गई है, जिसमें इन कॉलेजों में शैक्षणिक एवं भौतिक ढांचे संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं।

तीन प्रमुख लॉ कॉलेजों में बंद हुए प्रवेश के दरवाज़े

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगली सूचना तक यह संस्थान कोई भी प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करेंगे। रोक लगे कॉलेजों के नाम इस प्रकार हैं- आदित्य कॉलेज ऑफ लॉ एत्मादपुर, डीएस लॉ कॉलेज इरादतनगर और श्री जगदंबा लॉ कॉलेज, फाउंड्री नगर।

इसी तरह अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध आरजे लॉ कॉलेज खैर पर भी लॉ में प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

देश भर में 11 कॊलेजों में प्रवेश पर लगी है रोक

बीसीआई ने इस संबंध में पत्र जारी कर कहा है कि बीसीआई ने देश के लॉ कॉलेजों का उच्च स्तरीय औचक निरीक्षण निगरानी समिति से कराया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर देश के 11 लॉ कॉलेजों में सत्र 2025-26 में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। निगरानी समिति की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि किसी भी संस्थान को सत्र 2025-26 के लिए भारतीय विधि शिक्षा परिषद से अनुमोदन पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

इन कॉलेजों को बीसीआई द्वारा दिए गए मानकों के अनुरूप सुधार करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक कोई नया प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा।

छात्रों में निराशा, विकल्पों की तलाश में युवा

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इन संस्थानों में दाखिले की तैयारी कर रहे थे।
बार काउंसिल की यह रोक विद्यार्थियों के लिए गंभीर असमंजस की स्थिति पैदा कर रही है। अब छात्रों को या तो दूसरे शहरों की ओर रुख करना होगा या फिर वैकल्पिक करियर की योजना बनानी पड़ेगी।

SP_Singh AURGURU Editor