पांडव-यक्ष संवाद की साक्षी बरेली की लीलौर झील बनेगी आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र
-आरके सिंह- बरेली। पौराणिकता, इतिहास और प्रकृति की त्रिवेणी मानी जाने वाली लीलौर झील अब नए स्वरूप में नजर आएगी। प्राचीन पांचाल प्रदेश की राजधानी अहिच्छत्र के निकट स्थित इस महाभारतकालीन स्थल को आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को विस्तृत बैठक हुई, जिसमें झील के पुनरोद्धार और पर्यटन विकास की रूपरेखा तय की गई।
-महाभारतकालीन झील के सौंदर्यीकरण की योजना को मिली रफ्तार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई तैयारियां
पांडव और यक्ष संवाद का साक्षात स्थल
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि यह वही ऐतिहासिक झील है, जहां पांडव और यक्ष संवाद हुआ था। इसका धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व बहुत विशाल है। झील हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का ठिकाना भी बनती है, जिससे यह स्थल पारिस्थितिकी पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, पौराणिक महत्व, धार्मिक पर्यटन और आर्द्रभूमि संरक्षण के दृष्टिकोण से बेहद अहम है।
पहले भी हो चुकी है पहल
लीलौर झील को पुनर्जीवित करने की पहल सबसे पहले पूर्व जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एके सेंगर ने की थी। इसके बाद इस कार्य को गति दी कैप्टन राघवेंद्र विक्रम सिंह ने, जिन्होंने अरिल नदी को पुनर्जीवित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
मनरेगा से होगा सौंदर्यीकरण कार्य
बैठक में तय किया गया कि झील क्षेत्र का सौंदर्यीकरण मनरेगा योजना के तहत कराया जाएगा। इसमें झील के चारों ओर इंटरलॉकिंग सड़कें, नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था, ट्यूबवेल की स्थापना और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। विद्युत विभाग झील क्षेत्र में स्थायी जल आपूर्ति की योजना बनाएगा। सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
स्थानीय सहभागिता भी जरूरी
ग्राम प्रधानों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करें और नालों से गंदा पानी झील में न पहुंचे, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। झील के किनारों पर वन विभाग द्वारा हरियाली बढ़ाने और छायादार वृक्ष लगाने की योजना है।
प्रशासनिक स्तर पर हुई समीक्षा
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी देवयानी, अपर जिलाधिकारी प्रशासन पूर्णिमा सिंह, एसडीएम आंवला नहने राम, वन विभाग, विद्युत विभाग और सिंचाई विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों को अपने-अपने स्तर पर तेजी से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह योजना न केवल बरेली को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी, बल्कि इतिहास और प्रकृति को भी संरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।