बंगाल में जजों को बंधक बनाने की घटना, सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता सरकार से कहा- इस अदालत को खुली चुनौती, आप हमें मजबूर न करें
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव को लेकर पश्चिम बंगाल प्रशासन की कड़ी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने इस घटना को पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित प्रयास बताया, जिसका मकसद चुनावी प्रक्रिया को पटरी से उतारना था। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह घटना इस अदालत की सत्ता को खुली चुनौती देने की कोशिश थी।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बवाल हो गया। मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाया गया। इससे सुप्रीम कोर्ट खासा नाराज है। पश्चिम बंगाल की घटना पर सीजेआई सूर्यकांत ने न केवल सख्त टिप्पणी की, बल्कि अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल एसआईआर पर सुनवाई के दौरान मालदा की घटना पर सीजेआई सूर्यकांत ने संज्ञान लिया। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कल की घटना अदालत के अधिकार को खुली चुनौती देने की एक दुस्साहसी कोशिश थी। ममता सरकार को फटकार लगाते हुए सीजेआई ने कहा कि आप हमें कड़ी टिप्पणी के लिए मजबूर कर रहे हैं। हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुए विरोध प्रदर्शन पर गंभीर रुख अपनाया। इसमें एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बना लिया गया। कोर्ट ने इस मामले में एक अखबार में छपी रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल स्थित मालदा के एक गांव में हुए प्रदर्शन के दौरान यह घटना सामने आई, जहां प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया और उन्हें वहां से जाने नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालती हैं और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान कोर्ट राज्य प्रशासन से जवाब तलब कर सकता है।