सावधान आगरा, गैस बुकिंग के नाम पर मोबाइल में घुस रहे ठग, क्लिक करते ही उड़ रहा पैसा
आगरा में गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच अब साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। गैस बुकिंग, सिलेंडर उपलब्धता और जानकारी देने के नाम पर लोगों के मोबाइल पर फर्जी लिंक और APK फाइल भेजी जा रही हैं। जैसे ही यूजर इन्हें ओपन करता है, उसकी बैंकिंग जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है और कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम साफ हो जाती है। साइबर क्राइम सैल ने बताया कि सिर्फ गैस बुकिंग ही नहीं, बल्कि ई-चालान, शादी के कार्ड, KYC अपडेट और डिजिटल अरेस्ट जैसे बहानों से भी लोगों को फंसाया जा रहा है। हाल ही में सिकंदरा क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला से पुलवामा फंडिंग का डर दिखाकर करीब 7.5 लाख रुपये ठग लिए गए। इंस्पेक्टर रीता यादव और प्रभारी विमल कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें और ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 या साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
बुकिंग के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी लिंक और एपीके फाइल
आगरा। शहर में एक तरफ गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ अब साइबर अपराधियों ने इस परेशानी को कमाई का जरिया बना लिया है। गैस बुकिंग, सिलेंडर उपलब्धता और होम डिलीवरी की जानकारी देने के नाम पर लोगों के मोबाइल पर फर्जी लिंक और एपीके फाइल भेजी जा रही हैं।
साइबर क्राइम सैल के मुताबिक, जैसे ही कोई व्यक्ति इन संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है या एपीके फाइल इंस्टॉल करता है, उसकी बैंकिंग और मोबाइल एक्सेस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है। इसके बाद कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती है। यानी शहर में रसोई गैस की किल्लत अब सिर्फ घरेलू परेशानी नहीं रही, बल्कि यह साइबर ठगी का नया ट्रैप बन चुकी है।
‘सिलेंडर चाहिए?’… इसी सवाल से शुरू होता है ठगी का खेल
साइबर क्राइम सैल के अधिकारियों के अनुसार, ठग पहले लोगों को गैस सिलेंडर जल्दी दिलाने या बुकिंग कन्फर्म कराने का झांसा देते हैं। इसके लिए वे मोबाइल पर मैसेज, व्हाट्सएप लिंक या एपीके फाइल भेजते हैं।
मैसेज में लिखा होता है कि बुकिंग कन्फर्म करें,सिलेंडर स्लॉट चुनें, केवाईसी अपडेट करें,
सब्सिडी चेक करें, या तुरंत डिलीवरी के लिए लिंक खोलें। जैसे ही यूजर इन फर्जी लिंक पर क्लिक करता है या एपीके फाइल डाउनलोड करता है, ठगों को उसके मोबाइल पर नियंत्रण या बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है। इसके बाद ओटीपी , यूपीआई पिन, बैंकिंग ऐप एक्सेस, स्क्रीन शेयरिंग या डेटा चोरी के जरिए खाते से रकम उड़ा ली जाती है।
सिर्फ गैस बुकिंग नहीं, चालान और शादी के कार्ड भी बने साइबर जाल
साइबर अपराधी अब केवल गैस बुकिंग के नाम पर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे।
पुलिस के अनुसार, ठग कई और बहानों से भी फर्जी लिंक भेज रहे हैं, जैसे ऑनलाइन चालान भरने का लिंक, ई-चालान पेंडिंग का मैसेज, डिजिटल वेडिंग कार्ड / शादी का निमंत्रण, कूरियर डिलीवरी फेल होने का नोटिस, बिजली बिल / KYC अपडेट, सरकारी योजना का लाभ। इन सभी तरीकों का मकसद एक ही है, यूजर से लिंक खुलवाना, ऐप इंस्टॉल करवाना या OTP हासिल करना। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल ठग सीधे पैसे नहीं मांगते, बल्कि पहले मोबाइल पर कब्जा या डेटा एक्सेस लेने की कोशिश करते हैं, जिससे ठगी का दायरा और बड़ा हो जाता है।
सिकंदरा में बुजुर्ग महिला से ‘पुलवामा फंडिंग’ के नाम पर 7.5 लाख की ठगी
हाल ही में सिकंदरा क्षेत्र में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक बुजुर्ग महिला को साइबर अपराधियों ने फोन कर पुलवामा हमले में फंडिंग से जुड़ने का भय दिखाया। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताकर महिला को इतना डरा दिया कि उसने उनकी बातों में आकर करीब साढ़े सात लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई, तब ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित परिवार ने इस मामले में साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि डर, भ्रम और मनोवैज्ञानिक दबाव से भी लोगों को शिकार बना रहे हैं।
साइबर क्राइम सैल की चेतावनी
साइबर क्राइम सैल का कहना है कि आम लोग अक्सर एपीके फाइल का मतलब नहीं समझते और उसे सामान्य ऐप अपडेट या बुकिंग टूल मानकर इंस्टॉल कर लेते हैं। जबकि यही सबसे बड़ा खतरा है। एपीके फाइल इंस्टॉल होते ही मोबाइल में मैसेज पढ़ने, स्क्रीन रिकॉर्ड करने,
बैंकिंग ऐप देखने, नोटिफिकेशन एक्सेस, कॉल लॉग, कॉन्टैक्ट्स,और कभी-कभी रिमोट कंट्रोल तक की अनुमति हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि पुलिस बार-बार लोगों से अपील कर रही है कि Google Play Store/Official App Store के बाहर से कोई भी ऐप इंस्टॉल न करें।
साइबर क्राइम थाने की इंस्पेक्टर रीता यादव और साइबर क्राइम सैल के प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में गैस बुकिंग के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अपराधी लोगों की जरूरत और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। मोबाइल पर आई एपीके फाइल कभी ओपन/इंस्टॉल न करें। खुद को अधिकारी बताने वाली डराने वाली कॉल से घबराएं नहीं। कोई भी OTP, UPI PIN, बैंक डिटेल्स साझा न करें, गैस बुकिंग सिर्फ आधिकारिक ऐप/वेबसाइट/एजेंसी नंबर से करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।