भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को 78 साल बाद भी शहीद का दर्जा नहीं, जाट महासभा गरजी
शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के 118वें जन्मदिवस पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने सरकारों की संवेदनहीनता को जमकर लताड़ा। मां पीतांबरा परिसर, बमरौली रोड पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोंकर, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार (पूर्व पार्षद) ने दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए और कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा न मिलना उनकी शहादत का घोर अपमान है।
आगरा। शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के 118वें जन्मदिवस पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने सरकारों की संवेदनहीनता को जमकर लताड़ा। मां पीतांबरा परिसर, बमरौली रोड पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोंकर, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार (पूर्व पार्षद) ने दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए और कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा न मिलना उनकी शहादत का घोर अपमान है।
विचार गोष्ठी में कप्तान सिंह चाहर ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा – “कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया और भाजपा बीस साल से सत्ता में है, लेकिन दोनों ही दलों ने इन अमर बलिदानियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया। यह केवल दुखद ही नहीं बल्कि हुक्मरानों को शर्मसार करने वाली सच्चाई है।”
महानगर अध्यक्ष गजेंद्र दरबार ने घोषणा की कि जाट महासभा शीघ्र ही प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर इस मांग को बुलंद करेगी। महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोकर ने संचालन करते हुए कहा कि भगत सिंह जातिवाद और छुआछूत के कट्टर विरोधी समाजवादी विचारधारा के क्रांतिकारी थे। युवा अध्यक्ष लखन चौधरी और महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष निर्मल चाहर ने कहा कि 23 वर्ष की आयु में दिया गया बलिदान आज भी युवाओं को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता है।
इस मौके पर युवा कवि हीरेंद्र नरवर ने वीर रस की कविताओं से वातावरण गूंजा दिया। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने प्रधानमंत्री से मांग की कि इन तीनों क्रांतिकारियों को तत्काल शहीद का दर्जा दिया जाए। ज्ञानेंद्र मुखिया, लोकेंद्र भगोर, गौरव प्रधान इटोरा, सुभाष रावत, जितेंद्र रावत, कृष्णा पैलवार, श्रीमती रामवती चाहर, श्रीमती सरोज चाहर, विष्णु चौधरी, श्याम सिंह चाहर आदि ने भी विचार रखे।