महारानी बाग में भागवत कथाः भीष्म-कुंती स्तुति, नारद के पूर्वजन्म और भागवत रचना का वर्णन
महारानी बाग, बोदला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज का दिवस भक्ति, विनम्रता और सत्संग की अमृतवर्षा से सराबोर रहा, जब कथा स्थल भीष्म और कुंती की दिव्य स्तुति से गूंज उठा। भगवताचार्य दिनेश दीक्षित जी ने नारद के पूर्वजन्म, भक्ति की महिमा और व्यास जी द्वारा भागवत रचना के कारण का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
आगरा। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आज का दिन भक्तिरस से परिपूर्ण रहा। कथा में वर्णन हुआ कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के समक्ष वाणों की शैया पर स्थित भीष्म पितामह ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए उनकी स्तुति की। भगवान ने उन्हें धर्म, कर्तव्य और कृपा का सार सुनाया।
इसके बाद महारानी कुंती की गहन और हृदयस्पर्शी स्तुति का वाचन हुआ, जिसमें उन्होंने कृष्ण को “वसुदेवसुतं देवं” कहकर उनकी सर्वव्यापकता, करूणा और ईश्वरीय संरक्षण का गुणगान किया।
कथा में देवर्षि नारद के पूर्वजन्म का मार्मिक प्रसंग भी सुनाया गया। कथावाचक दिनेश दीक्षित जी ने बताया कि नारद पूर्व जन्म में एक दासी–पुत्र थे, जिन्होंने चातुर्मास के दौरान भक्त महात्माओं की सेवा करके भक्ति प्राप्त की। मृत्यु के बाद उन्हें नारद के रूप में दिव्य जन्म प्राप्त हुआ।
व्यास जी की आत्मिक रिक्तता और नारद के सुझाव से भागवत की रचना वाले प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। नारद ने व्यास जी से कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किए बिना कोई भी ग्रंथ मन को संतोष नहीं दे सकता। तब व्यास जी ने हरिद्वार में तप कर नारद के निर्देशन में श्रीमद्भागवत की रचना की।
शाम को आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर आयोजन समिति के डॉ. जीएस राणा, अनीता राणा, डॉ. अरुण प्रताप सिंह, आज के परीक्षित सानिध्य कुमार व वैशाली सिंह, चौधरी धर्मवीर सिंह, भूपेन्द्र सिंह परिहार, हेमन्त, लाल सिंह लोधी, रेनू सिंह, कृष्णा त्यागी, शैल परिहार, संध्या, दिनेश पाल, अरुण त्यागी, चौधरी पृथ्वी सिंह, संदीप परमार, सुनील बैरीवाल, डॉ. विपिन कुमार, महेशचंद आदि उपस्थित रहे।