भरतपुर की शाही विरासत का विवाद: राजा और युवराज की तनातनी से जाट खापों में बढ़ी हलचल

भरतपुर। पूर्व भरतपुर रियासत में शाही झंडे को लेकर उठा विवाद अभी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ है। अब रियासत की शाही विरासत और संपत्ति को लेकर विवाद नया मोड़ ले रहा है। पिता-पुत्र महाराजा विश्वेंद्र सिंह और युवराज अनिरुद्ध सिंह के बीच चार साल से चला आ रहा संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कुछ राजा समर्थकों द्वारा मोती महल के एक हिस्से पर शाही ध्वज फहराए जाने की घटना ने इस विवाद को और भड़का दिया है, जिससे शाही परिवार का झगड़ा अब खांप और समुदायों तक पहुंचता दिख रहा है।

Sep 23, 2025 - 21:31
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भरतपुर की शाही विरासत का विवाद: राजा और युवराज की तनातनी से जाट खापों में बढ़ी हलचल
भरतपुर के युवराज अनिरुद्ध सिंह और राजा विश्वेन्द्र सिंह, जिनके बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है।

21 सितंबर की रात सिनसिनी निवासी मनुदेव सिंह ने बलपूर्वक मोती महल का दरवाजा तोड़कर उस पर शाही झंडा फहरा दिया था। इस घटना के बाद स्थानीय खापों में खलबली मच गई। आरोपी मनुदेव अचानक सुर्खियों में आ गया और अब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वह घटना के समय शराब के नशे में था।

इसी बीच सिनसिनी गांव में आयोजित विशाल पंचायत में पूर्व राजा विश्वेंद्र सिंह ने ग्रामीणों और जाट सरदारी से सीधा संवाद किया। उन्होंने खुले तौर पर अपने समर्थन की मांग रखी। आगरा की चाहरवाटी खाप अभी चुप्पी साधे हुए है, पर उनका कहना है कि सिनसिनवार खाप से सीधी पहल होने पर ही वे निर्णय लेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, राजा विश्वेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि वे बसंत पंचमी के दिन मोती महल में प्रवेश करेंगे। वहीं, युवराज अनिरुद्ध के पक्ष में राजपूत समाज के नेता किरण शेखावत खड़े हो गये हैं। शेखावत अनिरुद्ध सिंह के समर्थन में गांव-गांव पंचायतें कर रहे हैं। इस तरह दोनों पक्ष लगातार अपने-अपने समर्थन जुटाने में लगे हैं।

जानकारों का मानना है कि शाही परिवार का यह विवाद अब केवल व्यक्तिगत दायरे तक सीमित नहीं रहा। जिस तरह समुदायों और खांपों के बीच ध्रुवीकरण हो रहा है, उससे निकट भविष्य में तनाव और बढ़ने की पूरी आशंका है।

SP_Singh AURGURU Editor