ज्ञानवापी वजूखाना विवाद पर बड़ा फैसला, 29 अक्टूबर को होगा कोर्ट निरीक्षण, बदले जाएंगे सीलिंग कपड़े

 ज्ञानवापी वजूखाने को लेकर कोर्ट का बड़ा निर्णय सामने आया है। कोर्ट ने वजूखाने पर लगे सील के कपड़े बदलने पर फैसला दिया है।

Oct 24, 2025 - 20:05
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ज्ञानवापी वजूखाना विवाद पर बड़ा फैसला, 29 अक्टूबर को होगा कोर्ट निरीक्षण, बदले जाएंगे सीलिंग कपड़े

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद केस में शुक्रवार को कोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वजूखाने को लेकर चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। 29 अक्टूबर की सुबह 9 बजे वाराणसी के जिला जज, दोनों पक्षों के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी ज्ञानवापी परिसर पहुंचकर मौके पर निरीक्षण करेंगे। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि वजूखाने पर लगी कपड़े की सील को बदला जाए या नहीं। अंतिम निर्णय वाराणसी के जिला अधिकारी लेंगे।

माना जा रहा है कि कोर्ट टीम के वजूखाने के निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। वाराणसी फैसला उस याचिका के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि वजूखाने पर लगी सीलिंग का कपड़ा अब खराब हो चुका है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से वजूखाने के गेट पर ताला लगा हुआ है। इसी ताले के ऊपर सरकारी मुहर लगा कपड़ा लगा था। बारिश के पानी और धूप की वजह से कपड़ा पूरी तरह से गल चुका था। इसी को बदलने को लेकर जिला जज ने आज दोनों पक्षों को बुलवाया था। उसे बदलने की जरूरत बताई गई। इस पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने मौखिक रूप से सहमति जताई है।  
 
दरअसल, वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने वाले हिस्से को सील किया गया था। यह वही स्थान है, जहां एएसआई सर्वेक्षण के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। उस समय परिसर में कुल नौ ताले लगाए गए थे और क्षेत्र को अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा में रखा गया था। अब, दो वर्षों बाद जब सीलिंग कपड़ा खराब हो गया है, तो अदालत से इसे बदलने की अनुमति मांगी गई है ताकि परिसर की सुरक्षा और स्थिति बरकरार रखी जा सके।

शुक्रवार को वाराणसी जिला अदालत में इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। दोपहर बाद करीब 3 बजे हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने कपड़ा बदलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद अदालत ने यह निर्णय लिया कि 29 अक्टूबर को मौके पर जाकर स्थिति का आकलन किया जाएगा। हालांकि, दोनों ही पक्ष ने इस याचिका पर कोई आपत्ति नही की जिसके बाद जिला जज संजीव शुक्ला ने इसे बदलने की इजाजत जिला प्रशासन को दे दी।

3 साल से बंद वजुखाने के मुख्य द्वार पर लगा ये सीलबंद कपड़ा बारिश के पानी और धूप की वजह से एकदम जीर्ण शीर्ण हो चुका था। जिला प्रशासन की तरफ से जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में इसे बदलने को लेकर याचिका दी गई थी। इसी याचिका पर दोनों पक्षों को आज जिला जज ने बहस के लिए बुलाया था।

हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि ज्ञानवापी मामला ट्रायल नंबर 18/22 के तहत चल रहा है। उन्होंने कहा कि एएसआई सर्वे के दौरान वजूखाना क्षेत्र में एक शिवलिंग मिलने का दावा हुआ था। यह बेहद संवेदनशील मामला है, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसलिए जिला प्रशासन ने उस हिस्से को सुरक्षा के दृष्टिकोण से सील कर रखा था।

वकील ने आगे कहा कि अब सीलिंग कपड़ा पूरी तरह खराब हो गया है। हमने अदालत से अनुरोध किया है कि इसे बदला जाए ताकि कोई भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

ज्ञानवापी विवाद की जड़ अगस्त 2021 में है, जब पांच हिंदू महिलाओं ने वाराणसी सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर मस्जिद परिसर में स्थित देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा की अनुमति मांगी थी। इस याचिका के बाद अदालत ने सर्वेक्षण आयोग गठित किया। सर्वे के दौरान, हिंदू पक्ष ने दावा किया कि वजूखाना क्षेत्र में एक शिवलिंग मिला, जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया।

इसके बाद 12 सितंबर 2022 को जिला न्यायालय ने हिंदू महिलाओं की पूजा की अनुमति से जुड़ी याचिका पर आपत्तियां खारिज कर दी थीं और सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी थी। यह आदेश पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के दायरे में बहस का कारण बना, क्योंकि यह कानून 15 अगस्त 1947 तक के धार्मिक स्वरूप को बरकरार रखने की बात कहता है।