जन्म और मृत्यु ही जीवन के सबसे बड़े दुख, समझ जाएंगे तो तर जाएंगे
आगरा। राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने जीवन के दो सबसे बड़े दुखों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु ही जीवन के दो सबसे बड़े दुख हैं, लेकिन मनुष्य इन्हें समझने में असफल रहता है और सुख और आनंद की तलाश में रहता है।
−डिफेंस एस्टेट फेस−1 के श्रीराम पार्क में गूंज रही श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारे की धुन, 8 और 10 को होगी रासलीला की प्रस्तुति
डिफेंस एस्टेट फेस−1 के श्रीराम पार्क में कथा के दूसरे दिन, सृष्टि रचना, नारद चरित्र, परीक्षित जन्म और सुखदेव आगमन प्रसंग के साथ जीवन उद्देश्य पर चर्चा की गई। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का लक्ष्य परमात्मा को बनाना चाहिए और कथा श्रवण के माध्यम से आत्म-चिंतन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर युग के साथ परमात्मा को प्राप्त करने का मार्ग बदल जाता है और कलयुग में भगवान की भक्ति से ही कल्याण हो सकता है।
कथा के दौरान, मुख्य यजमान सुनील गोयल और श्वेता गोयल ने व्यास पूजन किया। कथा के आयोजकों में दीपक गोयल, तनु गोयल, रवि गोयल, आरती गोयल, मनमोहन गोयल, पवन गोयल, विष्णु दयाल बंसल, छोटे लाल बंसल, अमित गर्ग और संदीप मित्तल शामिल हैं।
कथा के दौरान, 8, 9 और 10 फरवरी को सायं 7:30 बजे से वृंदावन धाम के स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर द्वारा रासलीला की प्रस्तुति होगी।