भाजपा मंडल अध्यक्षः बाह में ऐसा त्रिकोण बना कि प्रदेश नेतृत्व भी उलझ गया
आगरा। आगरा महानगर और जिला भाजपा के कुल 48 में 38 मंडलों में अध्यक्षों के नाम घोषित हो गए हैं। 48 मंडलों में से जिला प्रतिनिधियों के 37 नाम घोषित हो चुके हैं। 10 मंडल अध्यक्षों और 11 जिला प्रतिनिधियों की घोषणा बड़ों की अपनी-अपनी पसंद के कारण फंस गई है। जिले में बाह इकलौता ऐसा विधान सभा क्षेत्र है जहां एक भी मंडल से अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि निर्वाचित घोषित नहीं हुआ है।
- सांसद और विधायक की अपनी-अपनी पसंद, दोनों की खींचतान में जिलाध्यक्ष ने अपनी पसंद डाल दी
-आगरा जिले के अन्य चार मंडलों में अध्य़क्षों के नाम जातीय समीकरण साधने के चक्कर में फंस गए
आगरा जनपद को भाजपा ने संगठन के लिहाज से दो जिलों में विभाजित कर रखा है। पहला आगरा महानगर जिला और दूसरा आगरा देहात जिला। महानगर जिला इकाई में शहर के तीनों विधान सभा क्षेत्रों आगरा उत्तर, दक्षिण, छावनी के अलावा एत्मादपुर विधान सभा क्षेत्र भी आता है। महानगर जिला इकाई में कुल 22 मंडल हैं, जिनमें से 21 में मंडल अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। केवल आगरा उत्तर के गोपेश्वर मंडल में अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि का नाम घोषित होना बाकी है।
महानगर जिला इकाई के मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों के नाम घोषित होने के कई दिन बाद आगरा देहात जिला इकाई के मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों के नाम बीती रात घोषित किए गए। जिले में कुल 26 मंडल हैं, जिनमें से केवल 17 मंडलों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए गए। घोषित सूची में जिला प्रतिनिधियों के नाम 16 ही थे।
बाह विधान सभा क्षेत्र भाजपा संगठन के लिहाज से कुल पांच मंडलों में विभाजित है। कल रात घोषित मंडल अध्यक्षों की सूची में बाह क्षेत्र के एक भी मंडल अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि का नाम नहीं था। दूसरे शब्दों में कहें कि समूचे बाह विधान सभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों के नामों को लखनऊ स्तर से रोक लिया गया है।
बाह में इसलिए अटकी घोषणा
पार्टी सूत्रों की मानें तो बाह के पांचों मंडलों में अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधियों के नामों पर इसलिए सहमति नहीं बन पाई क्योंकि क्षेत्रीय सांसद राज कुमार चाहर और क्षेत्रीय विधायक रानी पक्षालिका सिंह की पसंद अलग-अलग है। सांसद अपने समर्थकों को पद दिलाना चाहते हैं तो यही इच्छा विधायक की भी है। सांसद और विधायक की खींचतान में जिलाध्यक्ष गिर्राज सिंह कुशवाह ने अपनी पसंद के लोगों के नाम आगे बढ़ा दिए। कुल मिलाकर अब इस क्षेत्र के मंडलों में ऐसा त्रिकोण बना कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी कोई फैसला नहीं कर सका।
देहात, खेरागढ़, शमसाबाद में जातीय समीकरण का पेंच
आगरा ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र के दो मंडलों बिचपुरी और धनौली में भी अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि के नाम घोषित नहीं हुए हैं। बताया गया है कि इन दोनों मंडलों में जातिगत समीकरणों का पेंच ऐसा फंसा कि प्रदेश नेतृत्व ने इन दोनों मंडलों के अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधियों के नाम घोषित करने पर रोक लगा दी।
इसी प्रकार जगनेर मंडल और शमसाबाद नगर मंडल में भी जातीय समीकरण साधने के चक्कर में अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। खेरागढ़ देहात मंडल के जिला प्रतिनिधि का नाम भी जातिगत समीकरण साधने के चक्कर में रुका है।
अब जिलाध्यक्ष बनने के बाद ही होंगे घोषित
माना जा रहा है कि बाह विधान सभा क्षेत्र के पांचों मंडलों के अलावा बिचपुरी, धनौली, जगनेर, शमसाबाद नगर आदि मंडलों के अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों के नामों का फैसला अब नया जिलाध्यक्ष घोषित होने के बाद ही हो सकेगा। जिलाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा मंडल अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि होने चाहिए, जो कि 17 मंडलों के नाम घोषित होने के बाद पहले ही पूरे हो चुके हैं।