ब्लैक टाइगर इन फ्रेमः आगरा के हरविजय सिंह बाहिया ने ओडिशा के सिमलीपाल जंगल में रचा इतिहास
आगरा। भारतीय वन्यजीवन फोटोग्राफी के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। आगरा के प्रसिद्ध उद्यमी, अंतरराष्ट्रीय वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर और साहस के प्रतीक हरविजय सिंह बाहिया ने ओडिशा के सिमलीपाल जंगल में दुर्लभतम ब्लैक टाइगर को प्रत्यक्ष रूप से अपने कैमरे में कैद कर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अब तक ब्लैक टाइगर की तस्वीरें केवल ट्रैप कैमरों के माध्यम से ही ली जा सकी थीं, जबकि किसी निजी फोटोग्राफर द्वारा प्रत्यक्ष फोटोग्राफी का यह पहला प्रमाणित प्रयास माना जा रहा है।
75 वर्ष की उम्र में अदम्य साहस का परिचय
75 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद हरविजय सिंह बाहिया ने यह सिद्ध कर दिया कि जुनून, साधना और संकल्प के आगे उम्र कोई बाधा नहीं। जंगल की कठिन परिस्थितियां, खतरे और शारीरिक चुनौतियां भी उनके इरादों को नहीं रोक सकीं। वन्य जीवन की रहस्यमयी दुनिया को कैमरे में उतारने की उनकी यह साधना अब उन्हें वैश्विक रिकॉर्ड की दहलीज तक ले आई है।
8 से 10 की संख्या, केवल सिमलीपाल में अस्तित्व
ब्लैक टाइगर वर्तमान समय में विश्व की सबसे दुर्लभ बाघ प्रजातियों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार पूरी दुनिया में इनकी संख्या मात्र 8 से 10 के बीच है और ये केवल ओडिशा के सिमलीपाल जंगल में ही पाए जाते हैं।
घने जंगलों में लगभग अदृश्य रहने वाला यह बाघ आम दृष्टि से छिपा रहता है, जिसे देख पाना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा माना जाता है।
20 जनवरी, दोपहर 12:14 बजे रचा इतिहास
20 जनवरी को दोपहर 12:14 बजे हरविजय सिंह बाहिया ने पीले धरातल पर चौड़ी काली धारियों से सुसज्जित ब्लैक टाइगर को कैमरे में कैद कर इतिहास रच दिया। वन विभाग के कर्मियों के अलावा किसी निजी फोटोग्राफर द्वारा लिया गया यह संभवतः पहला प्रत्यक्ष फोटोग्राफ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी जगत का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है।
फोटोग्राफर्स ने किया सम्मान
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में आगरा के प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स द्वारा सूर्य नगर स्थित ग्रीन बीन्स में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ फोटोग्राफर ललित राजोरा, अनिल शर्मा, वेदपाल धर, हर्षदीप उप्पल, अर्पण भार्गव, आनंद तिवारी और रिंकू शर्मा उपस्थित रहे।
वरिष्ठ वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर ललित राजोरा ने बताया कि इससे पहले ट्रैप कैमरे से ब्लैक टाइगर की तस्वीर लेने में करीब छह महीने का समय और लगभग दो करोड़ रुपये का खर्च आया था, जबकि हरविजय सिंह बाहिया ने यह उपलब्धि प्रत्यक्ष फोटोग्राफी से हासिल की, जो इसे और भी असाधारण बनाती है।
दिवंगत पत्नी से किया वादा निभाने के लिए की यात्रा
हरविजय सिंह बाहिया ने बताया कि ‘रॉक स्टार ऑफ बेरा’ और ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ कॉफी टेबल बुक्स के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि विश्व में पाई जाने वाली टाइगर की चारों प्रजातियों- ब्लैक टाइगर, बंगाल टाइगर, व्हाइट टाइगर और गोल्डन टाइगर, को एक ही कॉफी टेबल बुक में प्रस्तुत करेंगे।
यह संकल्प उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी इंदू से किया गया भावनात्मक वादा बताया।
तत्परता और साहस बना सफलता का मंत्र
उन्होंने बताया कि जंगल में प्रवेश के दौरान पहले एक छोटा ब्लैक टाइगर खेलता दिखा। उसी समय ट्रैकर बुधराम ने पेड़ों के बीच छिपे एक बड़े ब्लैक टाइगर की ओर संकेत किया। तत्परता, साहस और अनुभव के साथ उन्होंने उसका पीछा किया और ऐतिहासिक फोटो लेने में सफलता पाई।
ब्लैक टाइगर की फोटोग्राफी के लिए मात्र 5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वाहन चलाना, लगातार नजर बनाए रखना और हर पल खतरे को भांपना आवश्यक होता है।
अगला मिशन: गोल्डन और व्हाइट टाइगर
अब हरविजय सिंह बाहिया का अगला लक्ष्य असम के काजीरंगा में गोल्डन टाइगर और मध्य प्रदेश के रीवा में व्हाइट टाइगर को कैमरे में कैद करना है।
वे पहले ही बंगाल टाइगर की सफल फोटोग्राफी कर चुके हैं। यदि यह मिशन सफल होता है, तो वे संभवतः विश्व के पहले व्यक्ति होंगे, जो टाइगर की चारों दुर्लभ प्रजातियों को प्रत्यक्ष रूप से कैमरे में कैद कर एक ही कॉफी टेबल बुक में प्रकाशित करेंगे।