भक्ति, कला और संस्कृति का संगम बना ब्रज रज उत्सवः भ्रमर गीत रासलीला ने मोहा दर्शकों का मन

मथुरा। भक्ति, संगीत और नृत्य के रंगों से सजा ब्रज रज उत्सव गुरुवार की शाम एक अविस्मरणीय क्षण का साक्षी बना, जब मंच पर प्रस्तुत हुई भ्रमर गीत रासलीला ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। यह प्रस्तुति गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन के प्रशिक्षु कलाकारों द्वारा दी गई, जिसने पूरे परिसर में ब्रज भक्ति की सुगंध फैला दी।

Nov 6, 2025 - 23:06
Nov 6, 2025 - 23:07
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भक्ति, कला और संस्कृति का संगम बना ब्रज रज उत्सवः भ्रमर गीत रासलीला ने मोहा दर्शकों का मन
ब्रज रज उत्सव में गुरुवार को प्रस्तुत भ्रमर गीत रासलीला का एक दृश्य।

भ्रमर गीत में झलकी श्रीकृष्ण-गोपी विरह की करुणा

धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर चल रहे ब्रज रज उत्सव के 12वें दिन विशाल मंच पर प्रस्तुत “भ्रमर गीत” श्रीकृष्ण और गोपियों के विरह की वह लीला है, जो प्रेम, समर्पण और भक्ति की गहराइयों को उजागर करती है। इसका निर्देशन प्रो. दिनेश खन्ना (निदेशक, गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी) ने किया, जबकि संयोजन की जिम्मेदारी कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने निभाई।

युवा कलाकारों ने किया भावनाओं का उत्कृष्ट अभिनय

प्रशिक्षु कलाकारों श्रेयांश, हैरी चोटाला, कामिनी शर्मा, चांदनी, सुमिति भारद्वाज, निर्जला मिश्रा, जयंती त्यागी, प्रिया शर्मा, आकांक्षा शर्मा, रोशनी शर्मा, डोली ठाकुर, समीक्षा यादव, प्राची डे, विनीता शर्मा, वैष्णवी शाही, दीक्षा शर्मा, मोनिका गोला, रक्षिता, राधिका और गुंजन ने श्रीकृष्ण, राधा और गोपियों के रूप में मनमोहक अभिनय किया।

संगीत संयोजन आकाश शर्मा का रहा, जबकि वाद्य सहयोग में मनमोहन कौशिक (सारंगी), नंदी राम (बांसुरी) और सुनील पाल (तबला) का योगदान रहा। वस्त्र विन्यास रितु सिंह द्वारा किया गया और नृत्य प्रशिक्षण रोचना शर्मा ने प्रदान किया। इस नाट्य प्रस्तुति का काव्यात्मक आधार वृंदावन के कवि स्व. छैल बिहारी उपाध्याय ‘छैल’ की रचना पर आधारित था।

दर्शक दीर्घा में गूंज उठी तालियों की गड़गड़ाहट

नृत्य, संगीत और अभिनय के इस त्रिवेणी संगम ने दर्शकों को मुग्ध कर दिया। तालियों की गूंज के बीच पूरा मैदान भक्ति और आनंद के भाव में डूब गया। मंचन के उपरांत प्रो. दिनेश खन्ना ने कहा कि विद्यार्थियों ने ‘भ्रमर गीत’ के माध्यम से न केवल अपनी कला दिखाई, बल्कि ब्रज की भक्ति परंपरा को सजीव कर दिया। यही इस उत्सव की सच्ची सफलता है।

उत्सव स्थल पर रौनक और उल्लास का माहौल

ब्रज रज उत्सव में जहां मंचीय प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया, वहीं भक्ति संगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान और स्थानीय व्यंजन भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन झोन, महिलाओं के लिए खरीदारी के स्टॉलों पर भीड़ उमड़ रही है।

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को एसीईओ मदन चंद्र दुबे, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र और सहायक अभियंता आर.पी. यादव ने सम्मानित किया।

ब्रज रज उत्सव अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर है और 8 नवंबर तक मथुरा की सांस्कृतिक फिज़ा में इसी तरह भक्ति, कला और आनंद के स्वर गूंजते रहेंगे।

SP_Singh AURGURU Editor