दलितों पर सपा की निगाह पड़ते ही चौकन्नी हुईं बसपा सुप्रीमो मायावती  

आगरा। अपने सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर करणी सेना के बवाल के बाद समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जिस तरह उठा रही है, उससे बसपा सुप्रीमो मायावती चौकन्नी हो गई हैं। बसपा सुप्रीमो को शायद आभास हो गया है कि इस मुद्दे के जरिए सपा की नजर उनके दलित वोट बैंक पर है। यही वजह है कि मायावती ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ का गेस्ट हाउस कांड याद दिलाया है।

Mar 28, 2025 - 14:15
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दलितों पर सपा की निगाह पड़ते ही चौकन्नी हुईं बसपा सुप्रीमो मायावती   

सांसद सुमन द्वारा मेवाड़ के राजा संग्राम सिंह (राणा सांगा) के खिलाफ विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद उन पर चौतरफा प्रहार शुरू हुए थे, तब भी बसपा सुप्रीमो मायावती ने यही प्रतिक्रिया दी थी, ये हमले समाजवादी पार्टी के सांसद पर हैं, किसी दलित पर नहीं। दरअसल सपा ने पहले दिन से ही सुमन को दलित सांसद बताकर दलित कार्ड खेलने की कोशिश की थी। 

विगत 26 मार्च को जब सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर करणी सेना ने बवाल किया तो समाजवादी पार्टी ने इसे एक बार से दलित सांसद पर हमले से जोड़कर हवा देना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी ने इसे लेकर ईद बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा भी कर दी। स्पष्ट है कि सुमन के आवास पर हमले के खिलाफ आंदोलन छेड़कर दलितों को अपनी ओर खींचने की जुगत में है।

बसपा सुप्रीमो मायावती को समाजवादी पार्टी का यह पैंतरा समझने में ज्यादा देर नहीं लगी। मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि वे लखनऊ का वह गेस्ट हाउस कांड भी याद कर लेते, जिसमें आपके लोगों ने मेरे ऊपर जानलेवा हमला किया था। लगे हाथ मायावती ने अखिलेश यादव को गेस्ट हाउस कांड के लिए पश्चाताप करने की नसीहत भी दे डाली।

मायावती के इस बयान से स्पष्ट है कि वे आसानी से समाजवादी पार्टी को अपने वोट बैंक में सेंध नहीं मारने देंगी। मायावती गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाकर अपने दलित वोट बैंक को भी संदेश दे रही हैं कि समाजवादी पार्टी का दलितों के प्रति क्या नजरिया रहा है।

SP_Singh AURGURU Editor