सड़क सुरक्षा पर जागरूक हुआ व्यापार जगत: दुर्घटनाओं पर चिंता, तकनीकी निगरानी की उठी मांग

आगरा। चैम्बर सभागार में आज सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिवक्ता, चिकित्सक और उद्यमियों ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए प्रभावी निगरानी, त्वरित मुआवजा प्रणाली और जनजागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष श्री संजय गोयल ने की, जबकि संचालन जनसंपर्क समन्वय प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्री मनीष अग्रवाल ने किया।

Jun 27, 2025 - 22:47
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सड़क सुरक्षा पर जागरूक हुआ व्यापार जगत: दुर्घटनाओं पर चिंता, तकनीकी निगरानी की उठी मांग
सड़क सुरक्षा को लेकर नेशनल चैंबर सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन, डॊ. उद्धव बंसल, चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल एवं पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल आदि।

हर वर्ष 4.5 लाख दुर्घटनाएं, उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर
अधिवक्ता श्री के.सी. जैन ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4.5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 45 प्रतिशत लोग घायल होते हैं। सबसे अधिक मृत्यु दर उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद वर्ष 2023 और 2024 की सड़क दुर्घटना संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।

हिट एंड रन मामलों में मुआवजा न के बराबर
हर साल लगभग 67 हजार हिट एंड रन की घटनाएं होती हैं, परंतु केवल 1-2 प्रतिशत मामलों में ही पीड़ितों को मुआवजा मिल पाता है। अधिवक्ता जैन ने कहा कि घायल को 50 हजार और मृतक को 1.30 लाख रुपए तक मुआवजा देने की योजना है, जो 7 दिनों के भीतर दिया जाना चाहिए, लेकिन राज्य दुर्घटना समिति की निष्क्रियता के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही।

ट्रैफिक पुलिस की संख्या बेहद कम, तकनीकी व्यवस्था आवश्यक
देश में 37 करोड़ वाहन हैं जबकि केवल 75 हजार ट्रैफिक पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। ऐसे में अधिवक्ता जैन ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली को अनिवार्य बताया और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को तकनीकी व्यवस्थाएं लागू करने के निर्देश दिए हैं।

चालान तो हुए 40 हजार करोड़ के, वसूली केवल 16 हजार करोड़
बैठक में यह भी बताया गया कि देश में अब तक 40 हजार करोड़ रुपए के चालान किए जा चुके हैं, परंतु केवल 16 हजार करोड़ रुपए की वसूली हो सकी है। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि कई पुराने वाहनों की जानकारी आज भी अपूर्ण है, जिनका मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं है।

डॉक्टर की चेतावनी: हेलमेट कभी न उतारें, गोल्डन ऑवर में इलाज जरूरी
न्यूरोसर्जन डॉ. उद्धव बंसल ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद मस्तिष्क में चोट लगने पर रोगी को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के समय हेलमेट को नहीं उतारना चाहिए, केवल शीशा उठाकर सांस की स्थिति जांचें। उन्होंने बताया कि सही देखभाल मिलने पर गंभीर रोगी 2 से 6 महीने में पूर्णतः ठीक हो सकता है।

सीट बेल्ट और वाहन संचालन के नियमों का पालन ज़रूरी
डॉ. बंसल ने बताया कि कार में ड्राइवर के साथ-साथ सामने और पीछे बैठे यात्रियों को भी सीट बेल्ट लगाना चाहिए, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं में जान बचाई जा सकती है।

बैठक में उठे कई अहम सवाल
पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल द्वारा यह सवाल उठाया गया कि चालान पर ड्राइवर जिम्मेदार होगा या मालिक, जिस पर स्पष्ट किया गया कि वाहन चालक ही जिम्मेदार माना जाएगा।

उपस्थित गणमान्यजन
बैठक में उपाध्यक्ष विवेक जैन, सूरज तिवारी, रंजीत सामा, विकास मित्तल, अनिल कुमार गर्ग, मनोज गुप्ता, प्रशांत शर्मा, राजेन्द्र अग्रवाल, महेश अग्रवाल, गिरीश गोयल, निमई मित्तल, दिनेश अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, विनोद गोयल, लकी जैन, राजेश वर्मा, रविशंकर अग्रवाल, अभिषेक गोयल, विशाल धमाणी, पंकज गोयल और आशीष जैन सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor