कला के जरिए सनातन चेतना जगाने का आह्वान, संस्कार भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने आगरा में भरी नई ऊर्जा

संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले और त्रि-क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार के एक दिवसीय आगरा प्रवास के दौरान भारतीय कलाओं में सनातन दृष्टि, हिंदू कला बोध और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर गहन चर्चा हुई। अभिजीत गोखले ने कहा कि कला मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना, संस्कार और समाज निर्माण का माध्यम है, जबकि विजय कुमार ने विदेशी सांस्कृतिक प्रभावों और फंडिंग के जरिए भारतीय संस्कृति को कमजोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई। बैठक में RSS के पंच परिवर्तन को कला से जोड़कर समाज परिवर्तन की दिशा पर विचार हुआ। साथ ही संगठन विस्तार, नई प्रतिभाओं को जोड़ने और भारतीय कला मूल्यों के संरक्षण-संवर्धन पर भी जोर दिया गया।

Mar 25, 2026 - 21:27
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कला के जरिए सनातन चेतना जगाने का आह्वान, संस्कार भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने आगरा में भरी नई ऊर्जा
संस्कार भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ स्थानीय पदाधिकारी।

अभिजीत गोखले बोले-‘कला मनोरंजन नहीं, संस्कार और साधना का माध्यम’, विजय कुमार ने विदेशी सांस्कृतिक हस्तक्षेप पर जताई चिंता

आगरा। भारतीय कला परंपरा में सनातन दृष्टि को सशक्त और व्यापक बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले तथा त्रि-क्षेत्रीय संगठन मंत्री एवं प्रचारक विजय कुमार का एक दिवसीय आगरा प्रवास संपन्न हुआ। इस दौरान दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संस्कार भारती के प्रमुख कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर संस्था की गतिविधियों, विस्तार और भविष्य की दिशा पर गंभीर मंथन किया।

बैठक में भारतीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनमें ‘हिंदू कला दृष्टि’ विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि कला केवल मनोरंजन या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, साधना और समाज परिवर्तन का सशक्त साधन है। आगरा प्रवास ने संस्कार भारती के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और वैचारिक स्पष्टता का संचार किया।

बैठक को संबोधित करते हुए संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले ने कहा कि भारत की कला परंपरा अत्यंत समृद्ध, गहन और जीवनदृष्टि से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि कला को केवल मनोरंजन या मंचीय अभिव्यक्ति तक सीमित करना भारतीय दृष्टि के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि कला, स्वांत सुखाय की साधना है। कला संस्कारों के प्रचार-प्रसार, संवर्धन और प्रतिष्ठा का माध्यम है। कला के जरिए समाज में सनातन दृष्टि विकसित की जा सकती है। भारतीय समाज में सभी कलाओं के भीतर हिंदू कला दृष्टि का विकास आवश्यक है। गोखले ने कहा कि संस्कार भारती बीते 45 वर्षों से निरंतर, अविराम और अविरल प्रयास कर रही है, लेकिन अभी भी लक्ष्य बहुत बड़ा है और कार्य शेष है। उन्होंने विश्वास जताया कि समाज के सामूहिक प्रयासों से भारत की कला चेतना को उसके मूल स्वरूप में पुनः प्रतिष्ठित किया जा सकेगा।

अभिजीत गोखले ने कहा कि भारत की परंपरा में वर्णित 64 कलाएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे आज भी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आधारशिला बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ नई और आधुनिक कलाओं का विकास हुआ है, इसलिए संस्कार भारती का प्रयास होना चाहिए कि पारंपरिक 64 कलाओं का संरक्षण हो। आधुनिक कलाओं का भी भारतीय दृष्टि से समावेश किया जाए। नई पीढ़ी को कला के माध्यम से भारतीयता, संस्कृति और राष्ट्रबोध से जोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कला का भारतीय चरित्र बचाना है, तो उसे केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं बल्कि जन-जन के जीवन-मूल्यों से जोड़ना होगा।

आरएसएस के ‘पंच परिवर्तन’ को कला से जोड़ने पर हुआ मंथन

बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के बिंदुओं को संस्कार भारती की गतिविधियों से जोड़कर व्यापक सामाजिक परिवर्तन पर भी गंभीर चर्चा हुई। पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वावलंबन, वसुधैव कुटुंबकम् इन पांच बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार हुआ। अभिजीत गोखले ने कहा कि यदि कला इन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का माध्यम बन जाए, तो वह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की शक्ति बन सकती है।

बैठक में त्रि-क्षेत्रीय संगठन मंत्री एवं प्रचारक विजय कुमार ने वर्तमान सांस्कृतिक चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज भारत में विदेशों से कई प्रकार की ऐसी कलात्मक और सांस्कृतिक प्रवृत्तियां लाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला मूल्यों को कमजोर करना है।

उन्होंने कहा कि विदेशी प्रभावों के जरिए भारतीय सांस्कृतिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश हो रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग भी लाई जा रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भारतीय समाज को भ्रमित और विभाजित करने के प्रयास जारी हैं। समाज और कला जगत को जागरूक, सतर्क और संगठित रहना होगा। विजय कुमार ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि भारतीय कला और संस्कृति की रक्षा केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि वैचारिक और संगठित संघर्ष का विषय है।

संस्कार भारती के विस्तार पर चर्चा

आगरा प्रवास के दौरान हुई बैठक में केवल वैचारिक विमर्श ही नहीं, बल्कि संस्कार भारती की वर्तमान गतिविधियों, संगठनात्मक विस्तार, स्थानीय इकाइयों की सक्रियता, नई प्रतिभाओं को जोड़ने और कला-आधारित कार्यक्रमों को व्यापक बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि महानगर और जिला स्तर पर कलात्मक गतिविधियों को और सक्रिय किया जाए। युवा कलाकारों, साहित्यकारों, संगीतकारों और दृश्य कला से जुड़े लोगों को अधिक जोड़ा जाए। भारतीय संस्कृति आधारित रचनात्मक कार्यक्रमों को नियमित रूप से बढ़ाया जाए। समाज में संस्कार, राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रसार हेतु कला को माध्यम बनाया जाए। 

इनकी रही उपस्थिति

बैठक में संस्कार भारती और संगठन से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष एडवोकेट सुभाष चंद्र अग्रवाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रचारक बांकेलाल गौड़, ब्रज प्रांत महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग, महानगर अध्यक्ष आर्किटेक्ट राजीव द्विवेदी, महानगर महामंत्री ओम स्वरूप गर्ग, महानगर कोषाध्यक्ष राजीव सिंघल, महानगर सह-कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंघल, महानगर मंचीय कला प्रमुख इंजीनियर नीरज अग्रवाल, महानगर दृश्य कला प्रमुख डॉ. आभा सिंह गुप्ता, मंत्री नीता गर्ग, जिला अध्यक्ष रामावतार यादव, जिला महामंत्री यतेंद्र सोलंकी, जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र गोयल, संगीतकार हरिओम माहौर, नीता मिश्रा, प्रचारक नन्द किशोर जी शामिल रहे। बैठक का संचालन नन्द नन्दन गर्ग ने किया, जबकि कल्याण मंत्र ओम स्वरूप गर्ग ने प्रस्तुत किया।