रामराज्य का आह्वान और ‘धर्म है दर्शन’ का संदेश: आगरा की रामकथाओं में गूंजे संस्कार, समाज और राष्ट्रधर्म
आगरा। शहर में आयोजित विभिन्न श्रीराम कथा महायज्ञों में भक्ति, आस्था और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां लंगड़े की चौकी स्थित कथा में रामराज्य के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया गया, वहीं पीएस गार्डन में संतों ने धर्म, संस्कार, भाषा और राष्ट्रधर्म पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया। दोनों कथाओं में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
पीएस गार्डन: ‘धर्म प्रदर्शन नहीं, दर्शन है’- स्वामी रामस्वरूपाचार्य
आगरा। पीएस गार्डन में आयोजित श्रीराम कथा में व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने धर्म, संस्कार और राष्ट्रधर्म पर गहन विचार रखते हुए कहा कि धर्म प्रदर्शन नहीं, बल्कि दर्शन है।
उन्होंने जटायू की कथा के माध्यम से बताया कि धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देना ही सच्चा कर्तव्य है। जटायू ने सीता माता की रक्षा करते हुए यह सिद्ध किया कि धर्म सर्वोपरि है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी भाषा और संस्कारों से है। भाषा में क्रोध नहीं, बल्कि बोध होना चाहिए। उन्होंने राम और रावण के उदाहरण से बताया कि संस्कारयुक्त भाषा ही व्यक्ति और राष्ट्र को महान बनाती है।
संत ने गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन से अधिक धर्म को महत्व दिया।
उन्होंने सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश को विपक्ष से कम, “पक्षियों” से अधिक खतरा है, जो पीछे से बाधा डालते हैं।
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि परिवार एक तिजोरी है और उसके सदस्य रत्न हैं। इसे सद्विचारों से संभालना चाहिए और जीवन को जिम्मेदारी के साथ जीना चाहिए। कथा में सांसद राजकुमार चाहर सहित अनेक गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रामराज्य का आदर्श अपनाएं- भरत उपाध्याय

लंगड़े की चौकी पर आयोजित श्रीराम कथा के समापन पर आरती के लिए मंच पर मौजूद विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल।
आगरा। गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी के तत्वावधान में लंगड़े की चौकी, शास्त्री नगर में आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ का समापन भव्य और भक्तिमय वातावरण में हुआ। अंतिम दिन भगवान श्रीराम की लंका विजय, रावण वध, अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास भरत उपाध्याय ने बालि-सुग्रीव प्रसंग के माध्यम से सच्ची मित्रता का संदेश देते हुए कहा कि मित्रता विश्वास और धर्म पर आधारित होनी चाहिए।
सुंदरकांड के दौरान हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और समर्पण का वर्णन हुआ, वहीं लंका दहन के प्रसंग पर पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।
उन्होंने बताया कि श्रीराम की सेना ने मिलकर समुद्र पर सेतु का निर्माण किया, जो यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयास और विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
रावण वध के प्रसंग में कहा गया कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक के प्रसंग पर श्रद्धालु खड़े होकर जयकारे लगाने लगे। कथा व्यास ने कहा कि रामराज्य न्याय, समानता और समृद्धि का प्रतीक है, जिसे अपनाना ही सच्ची श्रद्धा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने व्यास पूजन कर कथा का समापन किया। श्री हनुमंत धाम के महंत गोपी गुरु जी ने कहा कि रामकथा का समापन जीवन में राम के आदर्शों की शुरुआत है।
अंजलि द्विवेदी के भजनों पर झूमे श्रद्धालु, छप्पन भोग के साथ श्याम वार्षिकोत्सव सम्पन्न

मैं लाड़ला खाटू वाले का परिवार सेवा समिति के वार्षिकोत्सव में भजन प्रस्तुत करतीं अंजलि द्विवेदी।
आगरा। मैं लाड़ला खाटू वाले का परिवार सेवा समिति द्वारा जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्री श्याम वार्षिकोत्सव का भव्य संकीर्तन के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष राकेश राजपूत, सचिव अजय कुमार गोला, कोषाध्यक्ष कपिल सिंघल, उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा, राजेंद्र सिंह और मुकेश आसीवाल द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया।
बरेली से आई भजन गायिका अंजलि द्विवेदी ने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिनके भजनों पर भक्त देर रात तक झूमते रहे।
इस दौरान श्याम बाबा का दरबार रजनीगंधा, ऑर्चिड व गुलाब के फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया और छप्पन भोग अर्पित किए गए। संकीर्तन देर रात तक चला और मंदिर परिसर खचाखच भरा रहा।
कार्यक्रम में विपिन अग्रवाल, मोहित बंसल, पार्थ गोयल, डॉ. एस.के. यादव, आशीष अग्रवाल, निमित बिन्दल, अमित बंसल, कृष्णकांत गौतम, नीरज राजपूत, दिलीप राजपूत, सार्थक अग्रवाल, ऋषभ गुप्ता, धर्मेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।