बटेश्वर मेले में गूंजनी चाहिए उटंगन नदी की पुकार: जल संरक्षण सम्मेलन कराने की मांग

सिविल सोसायटी ऒफ आगरा ने जिला पंचायत अध्यक्ष से आग्रह किया है कि बटेश्वर मेले के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में उटंगन नदी पर केंद्रित ‘जल संरक्षण सम्मेलन’ भी शामिल किया जाए। संगठन का मानना है कि उटंगन नदी क्षेत्र में भूजल स्तर को बचाने और शुद्ध जल उपलब्ध कराने की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें जनजागरूकता के माध्यम से जनपद के हित में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Oct 3, 2025 - 19:20
Oct 3, 2025 - 19:22
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बटेश्वर मेले में गूंजनी चाहिए उटंगन नदी की पुकार: जल संरक्षण सम्मेलन कराने की मांग
आगरा में बहने वाली उटंगन नदी, जिसके जल संरक्षण के लिए लमबे समय से मांग की जा रही है।

सोसायटी ने इसके बारे में जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है। संगठन के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने बताया कि उटंगन नदी से जुड़ी योजनाएं भूजल संकट झेल रहे आगरा जनपद के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। रेहावली (फतेहाबाद तहसील) और रीठे (बाह तहसील) गांवों के बीच मानसूनी पानी रोककर करोड़ों घन मीटर पानी का भंडारण संभव है। यह पानी बटेश्वर मंदिर के घाटों तक शुद्ध और ताजा जल पहुंचाने में भी काम आ सकता है। उल्लेखनीय है कि कार्तिक पूर्णिमा, शिवरात्रि और सोमवार के दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बटेश्वर में जुटती है और उस समय यमुना में स्वच्छ जल की सबसे अधिक आवश्यकता रहती है।

प्रस्तावित बांध परियोजना से शमसाबाद, फतेहाबाद, पिनाहट और बाह ब्लॉकों में भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा। इन क्षेत्रों के अधिकांश गांव अति-दोहित श्रेणी में आ चुके हैं, जहां गिरते जलस्तर के कारण हैंडपंप सूख चुके हैं और पेयजल संकट गहरा गया है।

सिविल सोसायटी का कहना है कि यदि बटेश्वर मेले जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर पर उटंगन नदी पर सम्मेलन आयोजित किया जाए, तो जन-भागीदारी बढ़ेगी और नीति-निर्माताओं तक जल संरक्षण का संदेश मजबूती से पहुंचाया जा सकेगा।

SP_Singh AURGURU Editor