आगरा कॉलेज में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पर करियर काउंसलिंग संगोष्ठीः विशेषज्ञ बोले- सीए की डिग्री राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम
आगरा। उच्च शिक्षा और करियर के क्षेत्र में तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच आगरा कॉलेज के वाणिज्य विभाग द्वारा चार्टर्ड अकाउंटेंसी: भविष्य और संभावनाएं विषय पर आयोजित करियर काउंसलिंग संगोष्ठी में छात्रों को सीए के क्षेत्र में अपार संभावनाओं और वैश्विक अवसरों से रूबरू कराया गया। विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि ‘सीए’ की डिग्री केवल करियर का विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम का आयोजन आगरा कॉलेज के वाणिज्य विभाग द्वारा किया गया, जिसका कुशल संचालन विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी शर्मा ने किया। संगोष्ठी में विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति रही और पूरे सत्र के दौरान गहन रुचि और उत्साह देखने को मिला।
विशेषज्ञों ने दिया सफलता का मंत्र
मुख्य अतिथि सीए विवेक अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, समर्पण में वह शक्ति है, जो समर्थ को भी झुकाने का साहस रखती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में अधिकतम 36 लाख रुपये और औसतन 12 लाख रुपये का पैकेज मिला, जो इस पेशे की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने 20 वर्षीय नंदिनी अग्रवाल और 71 वर्षीय ताराचंद अग्रवाल के उदाहरण देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में उम्र नहीं, बल्कि जुनून और प्रतिभा मायने रखती है।
आईसीएआई की विश्वसनीयता पर प्रकाश
विशिष्ट वक्ता सीए अजय जैन ने इंस्टीट्यूट ऒफ चार्टर्ड एकाउंटेंटस ऒफ इंडिया के गौरवशाली इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि सीए एक्ट 1949 के अंतर्गत स्थापित यह संस्था अपनी पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले 77 वर्षों में एक भी प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ, जो इसकी साख को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र 12वीं के बाद सीधे इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं।
वैश्विक अवसरों की भरमार
वर्तमान वाइस चेयरमैन सीए आयुष गोयल व्हाय वी डू सीए? विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय सीए की डिग्री को दुनिया के लगभग 15 देशों में मान्यता प्राप्त है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि केवल आगरा में ही करीब 600 चार्टर्ड अकाउंटेंट सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
पारदर्शी प्रणाली और किफायती शिक्षा
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस पाठ्यक्रम में किसी प्रकार का आरक्षण नहीं है और केवल योग्यता ही सफलता का आधार है। लगभग 4 वर्ष की अवधि वाले इस कोर्स की कुल फीस करीब 77 हजार रुपये है। साथ ही आर्टिकलशिप के दौरान विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष 5 हजार और द्वितीय वर्ष 7 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अमित अग्रवाल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने की। इस अवसर पर डॉ. ज्योत्सना शर्मा, डॉ. नीरज मनचंदा सहित वाणिज्य विभाग के सभी शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
यह संगोष्ठी छात्रों के लिए न केवल करियर मार्गदर्शन का मंच बनी, बल्कि उन्हें एक सुनियोजित और सफल भविष्य की दिशा में प्रेरित करने का माध्यम भी साबित हुई।