शारीरिक शोषण और गर्भपात कराने के आरोप में दरोगा पर मुकदमा

आगरा। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के कौशांबी थाने में तैनात दरोगा अविनाश कुमार के खिलाफ आगरा के ट्रांस यमुना थाने में दर्ज मुकदमे से पुलिस विभाग की छवि पर तो सवाल उठ ही रहे हैं, यह मामला विभागीय अनुशासन को लेकर भी चिंताएं बढ़ा रहा है।

Apr 11, 2025 - 10:47
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शारीरिक शोषण और गर्भपात कराने के आरोप में दरोगा पर मुकदमा

-गाजियाबाद में तैनात दरोगा पर आगरा की युवती ने कराया है केस

-इस तरह के बढते मामले पुलिस की छवि को कर रहे हैं दागदार

यह पहला मामला नहीं है। आए दिन इस तरह के मामले सामने आने से पुलिस की छवि दागदार हो रही है। 

दरोगा अविनाश कुमार के खिलाफ आगरा के ट्रांस यमुना थाने में अपने शोषण का आरोप लगाने वाली युवती दलित है और आगरा की ही निवासी है। उसका कहना है कि दरोगा अविनाश से उसकी पहचान हाथरस में हुई थी, जो बाद में दोस्ती में बदली और शारीरिक संबंधों तक जा पहुंची। दरोगा ने उसे शादी का वायदा कर शारीरिक शोषण किया। दरोगा पद पर चयन से पहले ही शोषण का सिलसिला शुरू हो गया था जो दरोगा बनने के बाद भी जारी रखा। 

पीड़िता का कहना है कि वर्ष 2022 से दरोगा अविनाश शादी का झांसा देकर उसका शोषण करता आ रहा था। फरवरी के अंतिम सप्ताह में उसे जानकारी हुई कि अविनाश की शादी कहीं और तय हो चुका है। इस पर उसने अविनाश से बातचीत की। विगत 16 मार्च को उससे मिलने आगरा आया और ट्रांस यमुना क्षेत्र के ही एक होटल में ले गया। वहां उसे फिर से झांसा दिया कि परिवार के दबाव में शादी तय कर ली है। दरोगा ने यहां भी उससे संबंध बनाए। दर्ज कराए मुकदमे में पीड़िता ने शारीरिक शोषण के अलावा गर्भपात कराने और धमकी के आरोप भी लगाए हैं। 

आगरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित साक्ष्यों को एकत्रित किया जा रहा है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

सवाल यह उठ रहा है कि जिस पुलिस को अनुशासित होना चाहिए, उसी के कुछ कर्मचारी इस तरह की हरकतें करने पर उतर आए हैं। महिलाओं की ओर से शोषण का पुलिस पर यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पर इस तरह के आरोप लग चुके हैं। पुलिसकर्मियों की ये हरकतें विभाग के अनुशासन को तो तार-तार कर ही रही हैं, पुलिस महकमे को भी बदनाम कर रही हैं।