सीईसी ने मालगोदाम की जमीन की परतें उधेड़ दीं
आगरा। गधापाड़ा स्थित रेलवे मालगोदाम की जमीन के मामले में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने शुक्रवार को कुछ ऐसे सवाल उठा दिए कि रेलवे, आरएलडीए (रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी) और गणपति बिल्डर्स के पास कोई जवाब नहीं था। सीईसी ने इन तीनों से एक सप्ताह के अंदर लिखित में अपना पक्ष रखने को कहा है। 24 जनवरी को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
-रेलवे हैंडओवर भी नहीं की थी और आरएलडीए ने बिल्डर को लीज पर दे दी जमीन
-एक और सवाल- जमीन भारत सरकार की है, रेलवे कस्टोडियन है तो रेलवे कैसे बेच सकता है इसे
-गणपति ने सीईसी की बैठक में साफ कहा कि उन्होंने नहीं काटे मालगोदाम की जमीन से पेड़
सीईसी ने आज मालगोदाम की जमीन से हरे पेड़ काटे जाने के मामले में शुक्रवार को तीसरी बार सुनवाई की। बैठक में सीईसी की ओर से एक अहम बात कही गई। रेलवे से कहा गया कि मालगोदाम की जमीन आपकी कैसे हो सकती है। यह तो भारत सरकार की संपत्ति है। रेलवे तो इसकी कस्टोडियन है और कस्टोडियन भारत सरकार की जमीन को कैसे बेच सकता है।
जमीन हैंडओवर भी नहीं, लीज पर दे दी
सीईईसी ने रेलवे की ओर से पहुंचे डीआरएम आगरा के प्रतिनिधि से पूछा कि क्या आपने रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी को मालगोदाम की जमीन हैंडओवर कर दी है। डीआरएम प्रतिनिधि के इंकार करने पर सीईसी की ओर से पूछा गया कि जब रेलवे ने जमीन हैंडओवर ही नहीं की है तो आरएलडीए ने इस जमीन को लीज पर कैसे दे दिया।
सीईईसी ने यह भी पूछा कि क्या इस जमीन को लेकर रेलवे और आरएलडीए के बीच कोई एमओयू हुआ है। इसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पर रेलवे और आरएलडीए से कहा गया कि वे एक सप्ताह के अंदर लिखित में बताएं कि इस जमीन के निस्तारण के लिए दोनों विभागों के बीच क्या प्रोसेस तय हुई थी।
गणपति ने पेड़ काटने से मना किया तो वीडियो दिखवाया गया
इसके बाद गणपति इन्फ्रास्ट्रचर की ओर से बैठक में पहुंचे एक निदेशक से पूछा गया कि क्या आपने मालगोदाम की जमीन से पेड़ काटे थे। निदेशक के ने इस पर कहा कि हमने नहीं काटे, लोकल लोगों ने काट लिए होंगे। इस पर सीईसी की ओर से वन विभाग के प्रतिनिधि से कहा गया कि जरा इन्हें वो वीडियो दिखाइए, जिसमें मालगोदाम के अंदर जेसीबी से पेड़ उखाड़े जा रहे हैं।
वीडियो देखने के बाद सीईसी की ओर से कहा गया कि क्या ये लोकल जेसीबी मशीन लाकर पेड़ उखाड़ सकते हैं। गणपति इन्फ्रास्ट्रक्टर की ओर से कहा गया कि उन्हें नहीं मालूम कि ये पेड़ किसने हटाए हैं। यह सब उनके व्यापारिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा कराया जा रहा है। वही अखबारों में खबरें छपवा रहे हैं।
आवासीय प्रोजेक्ट का ब्यौरा नहीं दे सके
इसके बाद सीईसी की ओर से सवाल किया गया कि मालगोदाम की जमीन पर आप कितने घऱ बनाने वाले हैं। इस पर आरएलडीए की ओर से बताया गया कि हमने तो कुल जमीन में 1.7 एफएआर दिया है। बिल्डर की ओर से कहा गया कि हमारे पास अभी कुछ नहीं है बताने को। इस पर सीईसी ने हैरानी जताते हुए कहा कि साढ़े तीन सौ करोड़ की जमीन ले रहे हो और प्रोजेक्ट तैयार नहीं है। यह कैसे हो सकता है।
सीईसी की ओर से एक बात यह भी कही गई कि हम मालगोदाम की जमीन पर सिटी फॊरेस्ट बनाए देते हैं। इस पर गणपति के निदेशक ने कहा कि मालगोदाम के पास ही बहुत बड़ा पालीवाल पार्क है। शहर वालों के लिए यह पार्क पर्याप्त है।
बैठक में पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता भी मौजूद थे, जिनकी शिकायत पर ही यह सुनवाई चल रही है। डॊ. गुप्ता से भी पूछा गया कि क्या उन्हें भी कुछ कहना है। इस पर उन्होंने कहा कि वे पहले ही लिखित में दे चुके हैं।
सभी पक्षों को सुनने और अपनी सुनाने के बाद सीईसी ने रेलवे, आरएलडीए और गणपति इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी से कहा कि आप एक सप्ताह के अंदर अपना पक्ष लिखित में दें। सीईसी ने यह भी कहा कि यह आखिरी सुनवाई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।