100 वर्षों की विरासत का उत्सव, कुलश्रेष्ठ सभा आगरा का शताब्दी समारोह 21 दिसंबर को

आगरा। सामाजिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और सेवा परंपरा की मिसाल रही कुलश्रेष्ठ सभा, आगरा अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रही है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए 21 दिसंबर 2025 (रविवार) को शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर सहित देश-विदेश से कुलश्रेष्ठ समाज के लोग शामिल होंगे।

Dec 20, 2025 - 12:38
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100 वर्षों की विरासत का उत्सव, कुलश्रेष्ठ सभा आगरा का शताब्दी समारोह 21 दिसंबर को
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आगरा। सामाजिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और सेवा परंपरा की मिसाल रही कुलश्रेष्ठ सभा, आगरा अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण करने जा रही है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए 21 दिसंबर 2025 (रविवार) को शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर सहित देश-विदेश से कुलश्रेष्ठ समाज के लोग शामिल होंगे।

कुलश्रेष्ठ सभा आगरा के प्रचार सचिव विशाल  कुलश्रेष्ठ ने बताया कि शताब्दी समारोह की शुरुआत प्रातः पावन हवन एवं विधिवत पूजन के साथ होगी। प्रथम सत्र प्रातः 9 बजे कुलश्रेष्ठ सभा भवन, शाहगंज में आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात द्वितीय सत्र के अंतर्गत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्नेह मिलन एवं सामूहिक भोज का आयोजन प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक अमल गार्डन मैरिज होम, पश्चिम पुरी, सिकंदरा में किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाज के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित व्यक्तित्व मनोज कुलश्रेष्ठ उपस्थित रहेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में  शिप्रा कुलश्रेष्ठ  एवं डॉ. अविनाश चंद्र समारोह की गरिमा बढ़ाएंगे। पूरा आयोजन कुलश्रेष्ठ सभा आगरा के अध्यक्ष  शशि कुमार कुलश्रेष्ठ के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न होगा, जबकि कार्यक्रम संयोजन की जिम्मेदारी  आलोक कुलश्रेष्ठ निभा रहे हैं।

शताब्दी समारोह के दौरान कुलश्रेष्ठ समाज की प्रतिभाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो समाज की सांस्कृतिक विरासत और युवा ऊर्जा को मंच प्रदान करेंगी। इसके साथ ही समाज के वरिष्ठजनों और विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में कुलश्रेष्ठ सभा की 1925 से 2025 तक की सौ वर्षों की यात्रा, सामाजिक योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों पर विशेष चर्चा भी की जाएगी।

सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, परंपरा और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से अपील की है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनें और समाज की शक्ति एवं एकता का संदेश दें।