सोच और रूह के जश्न की त्रिवेणीः अभिनेता राजपाल यादव को ताज साहित्य उत्सव–2026 अवार्ड, बोले- जहां समंदर की माप खत्म होती है, वहीं से कला का उद्गम होता है

आगरा। जहां सात समुंदर की माप खत्म होती है, वहीं से कला का उद्गम होता है। जीवन के रंगमंच पर हम सब छोटे-छोटे पात्र हैं और जो हमें संभाले, वही ईश्वर है। यह गूढ़ लेकिन सरल भाव अभिनेता राजपाल यादव ने इंटरनेशनल ताज साहित्य उत्सव के शुभारम्भ अवसर पर व्यक्त किए। हास्य के जरिए लोगों का “बीपी कंट्रोल” करने वाले राजपाल यादव ने अपने अंदाज में कला, जीवन और साधना का दर्शन भी करा दिया।

Jan 10, 2026 - 22:26
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सोच और रूह के जश्न की त्रिवेणीः अभिनेता राजपाल यादव को ताज साहित्य उत्सव–2026 अवार्ड, बोले- जहां समंदर की माप खत्म होती है, वहीं से कला का उद्गम होता है
जीडी गोयनका स्कूल में शनिवार को प्रारंभ हुए ताज साहित्य उत्सव में अभिनेता राजपाल यादव ताज साहित्य उत्सव 2026 अवार्ड प्राप्त करते हुए। चित्र में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॊ. बबिता चौहान भी हैं।

ताज साहित्य उत्सव में दीप जलातीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॊ. बबिता सिंह चौहान। 

गोयनका साहित्य अकादमी के तत्वावधान में जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, आगरा में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल ताज साहित्य उत्सव का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्वलन में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॊ. बबिता सिंह चौहान, अभिनेता राजपाल यादव समेत सभी गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि जीवन के हर मंच पर कहीं पढ़कर, कहीं गढ़कर और कहीं सुनकर उन्हें “500 जीवन” जीने का अवसर मिला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, अगर 500 बार जीवन का मौका मिले, तो हर बार कलाकार ही बनना चाहूंगा। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें कला को आकार देने और उसके विज्ञान को समझने का अवसर मिला। जब तक जीवन है, यह सेवा चलती रहेगी।

कार्यक्रम में जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने राजपाल यादव को ताज साहित्य उत्सव–2026 अवार्ड से सम्मानित किया। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक पवन आगरी तथा कार्यक्रम समन्वयक एवं स्कूल के प्रधानाचार्य पुनीत वशिष्ठ विशेष रूप से उपस्थित रहे।

साहित्य से दूर होती पीढ़ी पर चिंता

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी साहित्य से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया जब से दोस्त बना है, तब से दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है। ऐसे आयोजनों के जरिए युवाओं को साहित्य, संस्कार और चिंतन से जोड़ना बेहद जरूरी है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को सोशल मीडिया से हटाकर किताबों और संस्कृति की ओर मोड़ें।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम के प्रारम्भ में स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ प्रार्थना सहित विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने सराहा। अतिथियों का स्वागत पर्यावरण संदेश के साथ पौधे भेंट कर किया गया।

इस अवसर पर कांता प्रसाद अग्रवाल, पंकज शर्मा, कुलदीप ठाकुर, सुरेश चंद गर्ग, एस.ए. यादव, एडीएम आजाद भगत सिंह, राजेन्द्र सचदेवा, संजय तोमर, ज्ञानेन्द्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

साहित्य उत्सव में पुस्तकों का भव्य विमोचन

ताज साहित्य उत्सव में पीयूष पांडे की पुस्तक का विमोचन करते राजपाल यादव एवं अन्य अतिथि। 

आगरा। ताज साहित्य उत्सव के दौरान साहित्य प्रेमियों के लिए एक और विशेष क्षण तब आया, जब अभिनेता राजपाल यादव ने पत्रकार–लेखक पीयूष पांडे की नई किताब ‘उसने बुलाया था’ का विमोचन किया। पेंगुइन द्वारा प्रकाशित यह कृति एक क्राइम फिक्शन है। इससे पूर्व पीयूष पांडे द्वारा लिखी अभिनेता मनोज बाजपेयी की जीवनी काफी चर्चित रही है।

इसके साथ ही डॉ. बला जमाल की जुलैखा,, पंकज शर्मा की खिड़कियां, नाव्या वशिष्ठ की उलझन, यशवी शर्मा की मिसबी लाइफ, देवश्या चतुर्वेदी की अ गार्डन ऑफ स्टोरीज का भी विधिवत विमोचन किया गया।

विशेष उपलब्धि के रूप में जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के 34 विद्यार्थियों की रचनाओं से संकलित पुस्तक ‘ड्रीमलाइन’ का विमोचन भी किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों ने भविष्य की सशक्त लेखनी बताया।

कुल मिलाकर, ताज साहित्य उत्सव ने फिल्म, साहित्य और संगीत की त्रिवेणी के माध्यम से सोच, संवेदना और सृजन का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने आगरा के सांस्कृतिक परिदृश्य को नई ऊर्जा दी।

SP_Singh AURGURU Editor