आगरा में चंबल उफनाई: खतरे के निशान के पार पहुंचा पानी, गांवों में घुसा सैलाब, डीएम ने दौरा किया
आगरा। राजस्थान और मध्य प्रदेश में निरंतर भारी बारिश के बाद चंबल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कोटा बैराज और बनास नदी बांध से लगातार छोड़े जा रहे पानी ने आगरा में नदी को खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा दिया है। बुधवार को पिनाहट घाट पर नदी का जलस्तर 131 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से एक मीटर अधिक है। इससे नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुस गया है।
गांवों में घुसा पानी, संपर्क मार्ग कटे
लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते चंबल के किनारे बसे आधा दर्जन गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग कट गये हैं। बीहड़ और खेतों में पानी भरने से फसलें डूब रही हैं। ग्रामीणों ने पलायन शुरू कर दिया है और सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। प्रशासन गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर रहा है।
बाढ़ की आशंका, प्रशासन अलर्ट मोड में
बनास बांध के छह गेट खोले जाने से जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। बाह के एसडीएम व तहसील प्रशासन को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। 2019 और 2022 की भयावह बाढ़ की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने किया क्षेत्र का निरीक्षण
बुधवार को जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और एडिशनल पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह ने चंबल क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया। डीएम ने जलभराव वाले गांवों में स्टीमर चलाने और बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खतरे की संभावना वाले गांवों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और जलस्तर की निरंतर निगरानी की जाए।
फसलें डूबीं, जनजीवन प्रभावित
बीहड़ के खेतों में पानी भरने से फसलें पूरी तरह नष्ट हो रही हैं। पशुपालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चंबल की उफान मारती लहरों ने इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है।